पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने अपने भारत बनाम इंडिया वाले पोस्ट को लेकर सफाई दी है। उन्होंने कहा है कि राजनीति में उनकी कोई रुचि नहीं है। सहवाग ने एक्स पर अपने एक पोस्ट में लिखा था कि भारतीय टीम की जर्सी पर इंडिया की जगह भारत लिखा जाना चाहिए। इस पर एक यूजर ने लिखा कि गंभीर से पहले उन्हें सांसद बनना चाहिए था। इस पर सहवाग ने कहा कि राजनीति में उनकी रुचि नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों और अभिनेताओं को राजनीति में नहीं जाना चाहिए। पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने भी कहा है कि हमारे देश का मूल नाम भारत है।
सहवाग ने पहले क्या लिखा था?
सहवाग ने एक्स (पहले ट्विटर), ''मेरा हमेशा से मानना रहा है कि नाम ऐसा होना चाहिए जो हममें गर्व पैदा करे। हम भारतीय हैं, इंडिया अंग्रेजों द्वारा दिया गया एक नाम है और हमारे मूल नाम 'भारत' को आधिकारिक तौर पर वापस पाने में बहुत समय लग गया है। मैं बीसीसीआई और जय शाह से आग्रह करता हूं कि वह सुनिश्चित करें कि इस विश्व कप में हमारे खिलाड़ियों के सीने पर भारत हो।''
सहवाग ने दिए कई उदाहरण
सहवाग ने आगे लिखा, ''1996 के विश्व कप में नीदरलैंड भारत में विश्व कप में हॉलैंड के रूप में खेलने आया था। 2003 में जब हम उनसे खेले, तब वे नीदरलैंड थे और अब भी वही हैं। बर्मा ने अंग्रेजों द्वारा दिया गया नाम वापस बदलकर म्यांमार कर दिया है और कई अन्य लोग अपने मूल नाम पर वापस चले गए हैं।''
सहवाग ने बीसीसीआई के एक्स (ट्विट) को शेयर करते हुए लिखा, "टीम इंडिया नहीं, टीम भारत है। इस विश्व कप में जब हम कोहली, रोहित, बुमराह, जडेजा का नाम लेंगे तो तो उम्मीद है कि हमारे दिल में भारत हो और खिलाड़ी वह जर्सी पहनें जिस पर भारत लिखा हो।''
अब सहवाग ने क्या लिखा?
एक यूजर ने लिखा कि मेरा हमेशा से मानना रहा है कि गौतम गंभीर से पहले आपको सांसद होना चाहिए था। इस पर सहवाग ने लिखा "मुझे राजनीति में बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं है। पिछले दो चुनावों में दोनों प्रमुख पार्टियों ने मुझसे संपर्क किया है। मेरा विचार है कि अधिकांश मनोरंजनकर्ताओं या खिलाड़ियों को राजनीति में प्रवेश नहीं करना चाहिए क्योंकि अधिकांश अपने अहंकार और सत्ता की भूख के लिए (राजनीति) में हैं और लोगों के लिए मुश्किल से ही वास्तविक समय निकाल पाते हैं, कुछ अपवाद हैं लेकिन आम तौर पर अधिकांश केवल पीआर करते हैं। मुझे क्रिकेट से जुड़ना और कमेंटरी करना पसंद है और जब भी सुविधाजनक हो तो अंशकालिक सांसद बनना ऐसी चीज नहीं है जिसकी मैं कभी इच्छा करता हूं।"