भारत और वेस्टइंडीज के बीच टेस्ट सीरीज का दूसरा और आखिरी मुकाबला त्रिनिदाद के क्वींस पार्क ओवल में खेला जा रहा है। दोनों टीमों के बीच यह 100वां टेस्ट मैच है। वहीं, भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली का यह 500वां अंतरराष्ट्रीय मैच है। इस मैच की पहली पारी में भारत ने 438 रन बनाए हैं। भारत के लिए सबसे ज्यादा 121 रन का योगदान विराट कोहली ने दिया और अपने 500वें मैच को खास बना लिया।
विराट कोहली 500 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले 10वें खिलाड़ी हैं, लेकिन इस खास मौके पर शतक जड़ने वाले पहले क्रिकेटर हैं। उनसे पहले नौ खिलाड़ियों ने 500 से ज्यादा मैच खेले, लेकिन कोई भी अपने 500वें मैच में अर्धशतक तक नहीं लगा पाया। हालांकि, विराट से पहले सभी खिलाड़ियों का 500वां मैच वनडे या टी20 था।
कोहली ने अपने 500वें मैच में धैर्य के साथ बल्लेबाजी की और अधिकतर रन विकेटों के बीच भागकर बनाए। उन्होंने कुछ बेहतरीन चौके भी लगाए, लेकिन उसके लिए सही गेंद का इंतजार किया। विराट के शतक के बाद वेस्टइंडीज के महान खिलाड़ी कर्टनी वॉल्श ने विराट के शानदार खेल की सराहना करते हुए उन्हें भारत के महान बल्लेबाजों की सूची में केवल सचिन तेंदुलकर से पीछे बताया। वॉल्श ने खेल के कई और दिग्गजों की बात भी की और विराट को टॉप पांच में जगह भी दी।
वॉल्श ने कहा, "अगर भारत के महान बल्लेबाजों की बात करें तो मैं विराट को सचिन के ठीक पीछे रखूंगा, सचिन उन महान बल्लेबाजों से एक हैं, जिन्हें मैंने देखा है और जिनके खिलाफ मैं खेला हूं। वेस्टइंडीज के नजरिए से मैं ब्रायन लारा, विव रिचर्ड्स को सूची में ऊपर रखूंगा। रिकी पोंटिंग और स्टीव वॉ, यह दो ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनके खिलाफ मैं तब खेला था जब मैं युवा था। इंग्लैंड के ग्राहम गूच और जावेद मियांदाद, जिन्होंने शायद उतने ज्यादा मैच नहीं खेले, लेकिन उनके विकेट का महत्व बहुत था। विराट कोहली भी मुझे यही याद दिलाते हैं, वह पिच से जाना नहीं चाहते हैं। मैं बेशक कोहली को अपने टॉप चार या टॉप पांच की महानतम क्रिकेटर्स की सूची में रखूंगा।"
कैरिबियाई तेज गेंदबाज ने पहले भी कोहली से बातचीत की थी जब वह टीम के कप्तान थे, उस समय वॉल्श वेस्टइंडीज के चयनकर्ता थे और तब भी कोहली ने कहा कि जो भी वह करते हैं उसमें वह अपना बेस्ट देकर उसमें टॉप तीन या टॉप पांच में रहना चाहते हैं।
वॉल्श ने कहा, "विराट में खेल के प्रति वो जूनून है, वह हर मैच में अपनी छाप छोड़ना चाहते हैं। मुझे याद है एक बार उनसे बातचीत के दौरान, जब मैं वेस्टइंडीज टीम का चयनकर्ता था और वह कप्तान थे। वह केवल बेस्ट बनना चाहते हैं। ऐसा करने के लिए वह किसी से भी सुझाव लेने को तैयार थे और अब मैं उनकी उपलब्धियों से हैरान नहीं हूं। टॉप तीन या टॉप पांच बनने के लिए जिस तरह का समर्पण और जूनून वह दिखाते हैं, वह सराहने योग्य है।"