टीम इंडिया के लिए भले ही टी-20 वर्ल्ड कप से चुनौती खत्म हो गई है, लेकिन विराट कोहली ने जिस तरह से इस टूर्नामेंट में खेल दिखाया है उसकी धमक आगे लंबे समय तक बनी रहेगी।
विंडीज के खिलाफ भी कोहली ने जोरदार पारी खेली, लेकिन उनकी पारी टीम की जीत के लिए लाभदायक साबित नहीं हुई। जबकि इससे पहले उन्होंने पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लक्ष्य का पीछा करते हुए अकेले अपने दम पर टीम इंडिया को जीत दिलाई थी, खासकर कंगारुओं के खिलाफ मुकाबले में।
फिलहाल उन्होंने मुंबई में हुए सेमीफाइनल मैच में 189.36 की स्ट्राइक रेट के साथ बल्लेबाजी की और 47 गेंदों में 89 रनों की नाबाद पारी खेली। वह टी-20 में ऐसे बल्लेबाज बन गए हैं जिन्होंने सबसे तेज स्ट्राइक रेट के साथ 40 से ज्यादा गेंदें खेली लेकिन वह एक से ज्यादा (एक या एक भी छक्का नहीं) नहीं जड़ सके। हालांकि इस पारी में उनके बल्ले से एक छक्के के साथ 11 चौके निकले थे। कोहली ने 47 गेंदों में 6 पर डॉट बॉल, 19 पर एक रन, 10 पर 2 रन बनाए।
अपनी इस पारी में एक समय वह 31 गेंदों में 44 रन बना कर खेल रहे थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने आतिशी बल्लेबाजी करते हुए अगली 16 गेंदों में 45 रन कूट लिए।
साथ ही यह टूर्नामेंट उनके लिए किसी स्वपन सरीखा जैसा रहा। विंडीज के खिलाफ अर्धशतक लगाते हुए वह टी-20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा फिफ्टी लगाने वाले बल्लेबाज भी बन गए। उन्होंने अपनी 16वीं फिफ्टी पूरी की। इसके लिए उन्होंने क्रिस गेल और ब्रैंडन मैकुलम को पीछे छोड़ा। दोनों ने 15-15 बार 50 से ज्यादा की पारी खेली है। दोनों ने ही अपने टी-20 अंतरराष्ट्रीय करियर में 13 अर्धशतक के अलावा 2 शतक लगाए हैं।
वर्ल्ड कप से विदाई से पहले कोहली ने अपने टी-20 करियर में 40 पारियों में 1641 रन जोड़ लिए हैं।