उन्होंने कहा, 'न्यूजीलैंड में 300 से ज्यादा का लक्ष्य का पीछा करते हुए मैंने 87 रन बनाए थे जिससे मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ा। एक अन्य मैच में लक्ष्य का पीछा करते समय मैंने 60 रन बनाए थे। इन मैचों में मैं जब भी पांचवें क्रम पर बल्लेबाजी करने उतरा उस समय टीम को जीत के लिए 150-160 रन की जरूरत थी और यह जरूरी था कि मैं अच्छी पारी खेलूं और फिनिशर की भूमिका निभाउं।'
इस हरफनमौला खिलाड़ी ने कहा कि वह बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी पर भी बराबर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मैं खेल के दोनों पहलुओं पर बराबर ध्यान देता हूं। विजय हजारे ट्रॉफी के ज्यादातर मैचों में मैंने अपने 10 ओवर के कोटा को पूरा किया। रणजी ट्रॉफी में भी इस सत्र में मैंने काफी गेंदबाजी की। सबसे अच्छी बात यह है कि मैंने जो मेहनत की है उससे अब मानसिक तौर पर ज्यादा मजबूत महसूस कर रहा हूं।'
पांड्या के टीम से बाहर होने के कारण शंकर को मौका मिला लेकिन उन्हें इस बात की परवाह नहीं। उन्होंने कहा, 'मैं विश्व कप और दूसरी चीजों के बारे में नहीं सोच रहा हूं। जब आप ऐसी बाते सोचते हैं तो खुल कर नहीं खेल सकते। मुझे तैयार रहना होगा और अगर मौका मिलता है तो उसे लपकना होगा।'