क्या है पूरा मामला?
दरअसल, चेन्नई की पारी के 17वें ओवर में एनगिडी गेंदबाजी कर रहे थे। ओवर की दूसरी गेंद पर आयुष म्हात्रे आउट हुए थे। इसके बाद तीसरी गेंद पर गेंद जाकर सीधे ब्रेविस के पैड पर लगी। एनगिडी ने अपील की और फील्ड अंपायर नितिन मेनन ने उन्हें एल्बीडब्ल्यू आउट करार दिया। तब ब्रेविस का ध्यान रन लेने पर था। उन्होंने भाग कर दो रन ले लिए। बाद में वह जडेजा से चर्चा करने के बाद डीआरएस के लिए गए। हालांकि, विराट कोहली समेत आरसीबी के खिलाड़ियों ने घड़ी दिखाकर स्टॉपवॉच और टाइमर खत्म होने का हवाला दिया। इसके बाद नितिन ब्रेविस और जडेजा के पास गए। उन्होंने बताया कि टाइमर समाप्त हो चुका है और ब्रेविस को वापस जाना होगा। इस पर जडेजा ने कहा कि टाइमर बिग स्क्रीन पर तो चला नहीं तो बल्लेबाज को कैसे पता चलेगा 15 सेकंड कब शुरू हुआ? हालांकि, नितिन नहीं माने और ब्रेविस को वापस जाना पड़ा।
इरफान पठान और अनिल चौधरी का बयान
बाद में रीप्ले में दिखा कि गेंद लेग स्टंप को भारी अंतर से मिस कर रही थी। अगर डीआरएस लिया जाता तो ब्रेविस नॉटआउट होते। इसको लेकर इरफान पठान ने ट्वीट भी किया। उन्होंने लिखा, 'टाइमर था या नहीं था, लेकिन डेवाल्ड ब्रेविस के खिलाफ अंपायर नितिन मेनन ने डरा देने वाला फैसला लिया।' उनका कहना था कि साफ दिख रहा था कि गेंद लेग स्टंप को भी मिस कर जाएगी, लेकिन नितिन जैसे अनुभवी अंपायर का यह फैसला चौंका देने वाला था। इस मामले पर पूर्व अंपायर अनिल चौधरी ने कहा, 'एक बार जब बल्लेबाज को आउट करार दे दिया जाता है, तो गेंद डेड हो जाती है। ऐसे में आपको दौड़ने की कोई आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि वह रन काउंट नहीं होते। अगर डीआरएस के बाद फैसला बदलता भी और ब्रेविस आउट से नॉटआउट करार दिए जाते, तब भी रन काउंट नहीं होते।' यानी अनिल चौधरी की नजर में ब्रेविस को दो रन भागने की जगह डीआरएस की मांग करनी चाहिए थी।