विदर्भ ने सोमवार को रणजी ट्रॉफी 2017-18 के फाइनल में दिल्ली को 9 विकेट से हराकर इतिहास रच दिया। विदर्भ ने क्रिकेट इतिहास में पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता।
इंदौर के होलकर स्टेडियम में दिल्ली ने पहले बल्लेबाजी की और पहली पारी में 295 रन बनाए। जवाब में विदर्भ ने 547 रन बनाए और पहली पारी के आधार पर 252 की विशाल बढ़त हासिल की। इसके बाद दिल्ली की दूसरी पारी 280 रन पर ऑलआउट हो गई और विदर्भ को 29 रन का आसान लक्ष्य मिला। विदर्भ ने 5 ओवर में एक विकेट खोकर लक्ष्य हासिल किया और इतिहास रच दिया।
विदर्भ की इस जीत में प्रमुख भूमिका निभाने वाले खिलाड़ी रहे
रजनीश गुरबानी, जिन्होंने मैच में हैट्रिक समेत कुल 8 विकेट लिए। इसके अलावा
आकाश वाडकर (133) ने बल्ले से उम्दा प्रदर्शन किया।
मैच के चौथे दिन विदर्भ ने अपनी पारी 528/7 के स्कोर से आगे बढ़ाई। सिद्धेश नेरल (74) ने सुबह के सत्र में कुछ आकर्षक शॉट्स खेले, लेकिन वो आउट होने वाले पहले बल्लेबाज भी रहे। सैनी की गेंद पर विकेटकीपर पंत ने नेरल का अच्छा कैच लपका।
इसके बाद आकाश वाडकर (133) अपने स्कोर में कोई इजाफा नहीं कर सके और खेजरोलिया की गेंद पर नितीश राणा को कैच थमाकर पवेलियन लौट गए। आदित्य ठाकरे को सैनी ने शोरे के हाथों कैच आउट कराकर विदर्भ की पहली पारी ऑलआउट की।
इस तरह विदर्भ ने पहली पारी के आधार पर 252 रन की भारी-भरकम बढ़त हासिल की। दिल्ली की तरफ से नितिन सैनी ने सर्वाधिक 5 विकेट लिए। आकाश सुदन और कुलवंत खेजरोलिया ने दो-दो विकेट लिए। नितिश राणा को एक सफलता मिली।
विशाल बढ़त के बोझ तले बल्लेबाजी करने उतरी दिल्ली की दूसरी पारी में शुरुआत अच्छी नहीं रही और कुणाल चंदेला (9) व
गौतम गंभीर (36) जल्दी-जल्दी पवेलियन लौट गए।
दो विकेट जल्दी गिरने के बाद ध्रुव शोरे (62) और नितीश राणे (64) ने दिल्ली को संभाला। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 114 रन की साझेदारी की। सरवटे ने शोरे को विकेटकीपर वाडकर के हाथों कैच आउट कराकर इस साझेदारी को तोड़ा। रजनीश गुरबानी ने नितीश राणा को विकेटकीपर के हाथों झिलवाकर विदर्भ की वापसी कराई।
इसके बाद
ऋषभ पंत (32), हिम्मत सिंह (0), मनन शर्मा (8), विकास मिश्रा (34), नितिन सैनी (5), आकाश सुदन (18) कोई भी क्रीज पर ज्यादा देर नहीं टिका और दिल्ली की पूरी टीम 280 रन पर ढेर हो गई। विदर्भ की तरफ से अक्षय वखरे ने चार और आदित्य सरवटे ने तीन विकेट लिए। रजनीश गुरबानी ने दो जबकि सिद्धेश नेरल को एक विकेट मिला।
29 रन के आसन लक्ष्य का पीछा करने उतरी विदर्भ को एकमात्र झटका कप्तान फैज फजल (2) के रूप में लगा। खेजरोलिया ने फजल को LBW आउट किया। इसके बाद संजय रामास्वामी (9*) और वसीम जाफर (17*) ने विदर्भ को जीत दिलाकर इतिहास रच दिया।
यह विशेष बात
उल्लेखनीय है कि विदर्भ की टीम इस साल अपना पहला रणजी फाइनल खेल रही थी। इससे पहले विदर्भ की टीम दो बार सेमीफाइनल में पहुंची। 2002-03 और 2011-12 में सेमीफाइनल के लिए क्वॉलिफाई किया था, लेकिन टूर्नामेंट जीत नहीं सकी। इसके अलावा विदर्भ की टीम दो बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचने में कामयाब रही थी। पहली बार 1970-71 में इस टूर्नमेंट के क्वार्टर फाइनल में पहुंची थी, जबकि दूसरी बार 1995-96 में पहुंची।