द्रविड़ अब तक हर कसौटी पर खरे उतरे। उनकी देखरेख में इंडिया 'ए' ने
दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के साथ त्रिकोणीय सीरीज जीती। इसके बाद
बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका को उनके घर में हराया। उनकी टीम ने श्रीलंका में त्रिकोणीय सीरीज जीती और और इंग्लैंड को भी पराजित किया। द्रविड़ के होनहारों ने 2016 के अंडर-19 विश्वकप में भी कमाल किया था। टीम इंडिया तब भी बिना कोई मैच गंवाए फाइनल में पहुंची थी, हालांकि खिताबी मुकाबले में उसे वेस्टइंडीज से हार का सामना करना पड़ा था।
अंडर 19 टीम के कप्तान पृथ्वी शॉ,
शुभमन गिल, कमलेश नागरकोटी, अंकुल रॉय स्टार बन कर उभरे हैं। उनके मार्गदर्शन में कई खिलाड़ी टीम इंडिया का हिस्सा भी बन चुके हैं।
ऋषभ पंत, वाशिंगटन सुंदर अंडर 19 खेल चुके हैं। इसके अलावा
मनीष पांडे,
हार्दिक पांड्या, केदार जाधव, करुण नायर, श्रेयस अय्यर, युजवेंद्र चहल, जयंत यादव जैसे कई खिलाड़ियों ने टीम 'ए' का हिस्सा होते हुए राहुल द्रविड़ से क्रिकेट के गुर सीखे हैं।
दरअसल राहुल द्रविड़ केवल खिलाड़ी के खेल पर ही काम नहीं करते। वह खिलाड़ी को मानसिक रूप से मजबूत बनाने और उसके आत्मविश्वास को बढ़ाने से लेकर हर छोटी-मोटी बात पर भी ध्यान देते हैं। वह यह भी सिखाते हैं कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कैसे खुद को प्रासंगिक बनाए रखा जा सकता है।
द्रविड़ अपने खिलाड़ियों के लिए दीर्घावधि लक्ष्य तय करते हैं और फिर केवल उसी पर फोकस करते हैं। यही वजह है कि
आईपीएल नीलामी के मद्देनजर उन्होंने अपने लड़ाकों को पहले ही साफ-साफ कह दिया था कि उन्हें सिर्फ आईसीसी अंडर 19 विश्वकप पर फोकस करना है, न कि आईपीएल नीलामी पर। द्रविड़ ने कहा था कि खिलाड़ियों से यह बात छिपाने का कोई मतलब नहीं था कि आईपीएल में नीलामी चल रही थी। इसकी इसकी चर्चा हर जगह थी। लेकिन हमने इस पर चर्चा नहीं की। मैंने लड़कों को समझाया कि तुम्हें अपना फोकस दीर्घावधि लक्ष्य पर केंद्रित करना चाहिए, न कि तात्कालिक लक्ष्य पर।
विश्व कप जीतने के बाद राहुल द्रविड़ ने कहा, ‘अंडर-19 विश्वकप जीतने के लिए टीम इंडिया को बधाई। अपनी नई पीढ़ी के क्रिकेट सितारों की इस उपलब्धि पर देश को गर्व है। नए-नवेले क्रिकेटरों की प्रतिभा को दर्शाने वाली यह जीत केवल एक याद बनकर नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें अभी और अधिक चुनौतीपूर्ण सफर तय करना बाकी है। मुझे अपने खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टॉफ पर नाज है कि उन्होंने पूरा प्रयास किया।’
फील्डिंग कोच अभय शार्म और गेंदबाजी कोच पारस महांबरे की भी द्रविड़ ने जमकर सराहना की। द्रविड़ ने कहा कि पिछले 14 महीनों के दौरान सपोर्ट स्टॉफ ने जो सहयोग दिया वह अचंभित करने वाला है। द्रविड़ के मुताबिक पिछले 14 महीनों के दौरान हम सात-आठ लोग साथ ही रहे।
जीत के बाद अंडर-19 टीम के कप्तान पृथ्वी शॉ ने कहा, ‘विश्वकप जीत का सारा श्रेय कोचिंग स्टॉफ को जाता है। खासकर भारत की दीवार के रूप में जाने जाने वाले द्रविड़ सर तो अपने आप में लीजेंड हैं। हमने द्रविड़ और पारस महांबरे सर जैसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से बहुत कुछ सीखा।’