वेस्टइंडीज के 74 वर्षीय अंपायर बकनर 11 साल पहले संन्यास ले चुके हैं, लेकिन उन्हें अब भी तेंदुलकर को दो अवसरों पर गलत आउट देने की घटना याद है। उन्होंने 2003 में ब्रिसबेन में ऑस्ट्रेलिया के जेसन गिलस्पी की विकेटों के काफी ऊपर से जा रही गेंद पर पगबाधा आउट दे दिया था।
इसके दो साल बाद कोलकाता में उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ अब्दुल रज्जाक की गेंद पर भी सचिन को विकेट के पीछे कैच आउट दिया था जबकि गेंद उनके बल्ले पर नहीं लगी थी। बकनर ने इसे 'मानवीय गलती' करार दिया।
बकनर ने बारबाडोस में मैसन एवं गेस्ट रेडियो कार्यक्रम में कहा, 'तेंदुलकर को दो भिन्न अवसरों पर गलत आउट दिया गया। मुझे नहीं लगता कि कोई भी अंपायर गलत फैसला देना चाहेगा। ये चीजें उसके साथ जुड़ जाती हैं और इससे उसका करियर खतरे में पड़ सकता है।'
कुल 128 टेस्ट और 181 वन-डे में अंपायरिंग करने वाले बकनर ने कहा कि ईडन गार्डन्स में दर्शकों के शोर के कारण वह तब गेंद के बल्ले को स्पर्श करने की आवाज नहीं सुन पाए थे और उन्होंने गलत अनुमान लगा दिया था।
बकनर ने कहा कि डीआरएस के कारण अंपायरिंग में सुधार हुआ है और उन्होंने इस प्रणाली का विरोध करने वाले अंपायरों से फिर से सोचने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, 'जो अपांयर इस प्रणाली की मौजूदगी का आनंद नहीं उठा पा रहे हैं, मुझे आशा है कि वे इस पर दोबारा विचार करेंगे।'
बकनर ने कहा, 'जब मैं अंपायरिंग करता था तब अगर मैंने किसी बल्लेबाज को गलत आउट दे दिया तो यह अहसास की मैंने गलती की है आपको कचोटती है। आपको उस बारे में सोचकर नींद नहीं आती है। अब आप को जल्दी नींद आ सकती है क्योंकि आखिर में सही फैसला दिया गया।'