भारत दौरे पर आईं ऑस्ट्रेलिया की प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने दुनिया के महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया की मानद उपाधि से नवाजे जाने की घोषणा की है। गिलार्ड की इस घोषणा पर ऑस्ट्रेलियाई निवासियों ने रोष प्रकट किया है। कई ऑस्ट्रेलियाई वासियों ने सोशल साइट ट्विटर पर सचिन को ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया की मानद उपाधि देने के विरोध में ट्वीट किया है।
कुछ ऑस्ट्रेलियाई इस मौके पर 2008 के हरभजन-साइमंड्स विवाद (मंकीगेट कांड) को भी याद कर रहे हैं। मंकीगेट विवाद तब पैदा हुआ था, जब साइमंड्स ने आरोप लगाया कि हरभजन ने उन पर नस्ली टिप्पणी की थी। तेंदुलकर उन खिलाड़ियों में शामिल थे, जो इस मामले में गवाह के रूप में पेश हुए थे। सचिन ने कहा था कि हरभजन ने हिंदी में ऐसे शब्द का उपयोग किया था, जिसे बोलना अंग्रेजी में मंकी (बंदर) बोलने जैसा दिखाई देता है।
पीटर चैंबर्स(Peter Chambers) नामक व्यक्ति ने अपने ट्वीट में लिखा है, 'गिलार्ड ने तेंदुलकर को ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया से नवाजकर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का अपमान किया है। मंकीगेट एक ऑस्ट्रेलियन पर नस्लवादी हमला था। तेंदुलकर याद हैं न?'
कैमरोन हैमिल्टन (Cameron Hamilton) नामक ऑस्ट्रेलियाई व्यक्ति ने लिखा है, 'ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज खिलाड़ी शेन वॉर्न मौजूद हैं, तो फिर सचिन तेंदुलकर को ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया क्यूं दिया जा रहा है?'
मालकोलम कोन (Malcolm Conn) ने लिखा है, 'मंकीगेट वाले नस्लवादी प्रकरण में सचिन भी शामिल रहे हैं। इसके बाद भी प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ट तेंदुलकर को ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया से कैसे सम्मानित कर सकती हैं?