भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच सीरीज का तीसरा टेस्ट नागपुर में होने जा रहा है और यह मैच टीम इंडिया के लिए बेहद खास रहेगा क्योंकि यहां पर मिली जीत के साथ ही वह सीरीज पर कब्जा जमा लेगी। 4 मैचों की सीरीज का दूसरा मैच जो चेन्नई में खेला गया वो बारिश के कारण बुरी तरह से धुल गया और मैच ड्रॉ पर खत्म हो गया।
सीरीज के पहले मैच में विराट कोहली की अगुवाई में टीम इंडिया ने मोहाली में बड़ी जीत हासिल की थी और उसे उम्मीद थी कि चेन्नई में जीत हासिल कर सीरीज में अजेय बढ़त बना लेगी लेकिन लगातार बारिश ने मैच को रद करा दिया। अब सबकी नजर नागपुर टेस्ट पर है जहां मेजबान टीम अजेय बढ़त बनाना चाहेगी तो अफ्रीकी टीम सीरीज में वापस आना चाहेगी।
हालांकि नागपुर के जमाथा स्टेडियम में ही इसी अफ्रीकी टीम ने भारत की सरजमीं पर आखिरी बार कोई टेस्ट मैच जीता था। 2010 में भारत को मिली यह हार इस मैदान पर उसकी एकमात्र हार रही है। भारत ने यहां पर 4 टेस्ट मैच खेले हैं जिसमें उसे 2 में जीत मिली और एक मैच ड्रॉ पर खत्म हुआ। लेकिन इस मैदान पर भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी खुद उसके फिरकी गेंदबाज होंगे जो यहां पर कभी सफल नहीं रहे अगर वे नाकाम हुए तो भारत के लिए इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता।
पिछली बार हाशिम और स्टेन ने ढाया था टीम इंडिया पर कहर
भारत में खेली जा रही सीरीज में लगातार 3 बार दक्षिण अफ्रीकी टीम ऑलआउट हुई है और उसके बल्लेबाज भारतीय फिरकी गेंदबाजों के आगे लगातार संघर्ष कर रहे हैं लेकिन यह मैदान ऐसा है जहां पर अफ्रीकी टीम ने पिछली बार लाजवाब प्रदर्शन किया था।
2010 में खेले गए मैच में अफ्रीकी टेस्ट टीम के कप्तान हाशिम अमला ने 675 मिनट तक बल्लेबाजी की और कुल 473 गेंदों का सामना किया था जो कि भारतीय उपमहाद्वीप में किसी बाहरी खिलाड़ी का भारत में सबसे शानदार प्रदर्शन और ओवरऑल एशिया में तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (जब से गेंद का सामना करने की जानकारी है) रहा। अमला ने उस पारी में 253 रन बनाए थे। यह पारी भारत में किसी विदेशी बल्लेबाज की ओर से खेली गई चौथी सबसे बड़ी पारी भी रही।
भारतीय फिरकी गेंदबाज 2010 में खेली गई सीरीज में अमला पर अंकुश नहीं लगा सके थे। इस सीरीज में उन्होंने 1033 गेंदों का सामना किया और 3 पारियों में सिर्फ एक बार ही आउट हुए। हालांकि इस बार उनका बल्ला नहीं चल रहा और 121 गेंदों में 3 बार आउट हो चुके हैं।
दूसरी ओर, इसी टेस्ट मैच में तेज गेंदबाज डेल स्टेन ने भी कहर बरपाया था। पहली पारी में स्टेन ने 51 रन देकर 7 विकेट निकाले जो किसी विदेशी तेज गेंदबाज का इस मैदान पर 19 साल बाद सबसे नायाब प्रदर्शन था। उन्होंने इस मैच में 10 विकेट झटके थे।
इस मैदान पर संघर्ष करते रहे हैं भारतीय फिरकी गेंदबाज
टीम इंडिया में शामिल इस समय फिरकी गेंदबाजों के लिए नागपुर का यह मैदान बेहद खराब साबित हुआ है। टीम के फिरकी गेंदबाजों का गेंदबाजी औसत 46.09 के आसपास है। इस मैदान पर टीम में शामिल फिरकी गेंदबाजों ने सिर्फ एक बार ही 10 विकेटों के आंकड़ों को छुआ है। 2008-09 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच में अमित मिश्रा ने सबसे ज्यादा 3 विकेट लिए। आर अश्विन, अमित और रविंद्र जडेजा ने मिलकर 3 मैचों में 11 विकेट झटके हैं।
भले ही इस साल से पहले यह मैदान फिरकी गेंदबाजों के अनुकूल नहीं माना जाता रहा हो लेकिन हाल में खेले गए प्रथम श्रेणी टेस्ट मैचों से यह मैदान फिरकी गेंदबाजों के माकूल होता दिख रहा है जो आर अश्विन, अमित मिश्रा और रविंद्र जडेजा की तिकड़ी के लिए अच्छी खबर हो सकती है क्योंकि इन 3 गेंदबाजों में अमित ने 7 साल पहले सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाते हुए 3 विकेट लिए थे।
2015-16 के घरेलू सत्र की बात करें तो इस मैदान पर 2 प्रथम श्रेणी मैच खेले गए हैं जिसमें फिरकी गेंदबाजों ने 44 विकेट झटके हैं। स्पिनर्स ने 23.36 के औसत से विकेट निकाले जबकि तेज गेंदबाजों के विकेट हासिल करने का औसत 33.54 रहा।
नागपुर के वीसीए, जमाथा में टीम इंडिया की ओर से सबसे सफल टेस्ट भारतीय गेंदबाजों में तेज गेंदबाज इशांत शर्मा हैं जिन्होंने अब तक 14 विकेट लिए हैं। इशांत ने 4 टेस्ट मैचों में 23.50 की औसत से विकेट लिए हैं। 2010 में न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट मैच में 43 रन देकर 4 विकेट निकाले। वहीं स्थानीय तेज गेंदबाज उमेश यादव 6 प्रथम श्रेणी मैचों से 16 विकेट लिए जो इस मैदान के सबसे सफल गेंदबाज हैं।