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विश्व कप इतिहास के पांच सबसे रोमांचक फाइनल, जो आज भी क्रिकेट फैंस के रौंगटे खड़े कर देते हैं

Wed, 25 Mar 2020 04:00 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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हर चार साल में एक बार आयोजित होने वाला क्रिकेट विश्व कप ICC के कैलेंडर का सबसे बड़ा आयोजन होता है। दुनिया की बेहतरीन टीम के बीच होने वाले महासंग्राम के बाद एक सर्वश्रेष्ठ टीम चैंपियन बनती है। इन वर्षों में, वाकई कुछ खिताबी मुकाबले बेहद रोमांचक हुए तो कुछ एकतरफा निकले। अब जब कोरोना वायरस के संकट के बीच पूरा देश लॉकडाउन हो चुका है। लोग घरों में हैं तो आपके इस समय को मनोरंजक बनाने के लिए हम आपके लिए लेकर आए हैं, विश्व कप फाइनल के पांच ऐसे मुकाबले जिसे यादकर आप एक बार फिर रोमांचक हो जाएंगे।
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5. भारत बनाम श्रीलंका, 2011 विश्व कप फाइनल

इस विश्व कप फाइनल को देखने से लगता है कि भगवान भी यही चाहते थे कि सचिन तेंदुलकर अपने घरेलू मैदान पर वर्ल्ड कप ट्रॉफी उठाने का सपना पूरा कर ले। एशिया के तीन सुपर पावर (भारत-बांग्लादेश और श्रीलंका) ने मिलकर 2011 के टूर्नामेंट की मेजबानी की थी। फाइनल में भारत-श्रीलंका आमने-सामने थे। 2 अप्रैल को खेले गए इस खिताबी मुकाबले में श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 50 ओवर्स में छह विकेट खोकर 6/274 रन बनाए। मलिंगा ने कमाल दिखाते हुए पूरे टूर्नामेंट में चलनी वाले वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर को जल्द ही निपटा दिया। मगर गौतम गंभीर और फिर धोनी की बेहतरीन पारी के बूते न सिर्फ भारत ने वापसी की बल्कि कप्तान धोनी ने छक्का मारकर दूसरा विश्व कप अपने नाम किया।
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1996 विश्व विजेता श्रीलंकाई कप्तान अर्जुन रणतुंगा - फोटो : अमर उजाला

4. श्रीलंका बनाम ऑस्ट्रेलिया, 1996 विश्व कप फाइनल

1996 का विश्व कप दूसरी बार भारतीय उपमहाद्वीप में आयोजित किया गया जिसका आयोजन भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका ने संयुक्त रूप से किया। श्रीलंका ने लाहौर के मैदान पर जीत हासिल की और पहली बार विश्व कप का खिताब हासिल किया। फाइनल में ऑस्ट्रेलिया का मुकाबला श्रीलंका से हुआ। ऑस्ट्रेलिया ने पहले खेलते हुए मार्क टेलर के 74 रन की मदद से 241 रन बनाए, लेकिन श्रीलंका ने तीन विकेट के नुकसान पर ही लक्ष्य हासिल कर लिया। फाइनल में अरविंद डी सिल्वा ने दो कैच पकड़े, तीन विकेट लिए और नाबाद 107 रन की पारी खेली।

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विश्व कप 2003 - फोटो : सोशल मीडिया

3. भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया, 2003 विश्व कप फाइनल

9 फरवरी से 23 मार्च के बीच खेले गए आठवें विश्व कप का आयोजन पहली बार अफ्रीकी धरती (दक्षिण अफ्रीका/केन्या/जिंबाब्वे) पर किया गया था। 23 मार्च के वॉन्डर्स के मैदान पर भारतीय टीम को फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के हाथों 125 रन की शर्मनाक हार मिली। ऑस्ट्रेलियाई टीम ने लगातार दूसरी और कुल तीसरी बार चैंपियन बनी। पूरे टूर्नामेंट के दौरान भारतीय टीम का प्रदर्शन शानदार रहा था। मगर फाइनल में यह टीम करिश्मा करने से चूक गई। सचिन तेंदुलकर 2003 के विश्वकप के टूर्नामेंट के मैन ऑफ द टूर्नामेंट जरुर रहे थे। उन्होंने लगभग हर मैच में बल्ले के साथ अच्छा प्रदर्शन किया। कई मौकों पर तो भारत को जीत भी दिलाई थी। टूर्नामेंट की 11 पारियों में 61.18 की औसत से 673 रन बनाकर सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज भी थे। जिसमें छह अर्धशतक और एक शतक भी शामिल था। बावजूद इसके ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल में उन्होंने सभी को बहुत निराश किया।

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1983 विश्व कप विजेता कपिल देव - फोटो : अमर उजाला
4. भारत बनाम वेस्टइंडीज, 1983 विश्व कप फाइनल

25 जून 1983 को भारतीय क्रिकेट टीम ने पहली बार विश्व कप जीतकर पूरी दुनिया को चौंका दिया था। कपिल देव की अगुवाई वाली उस टीम ने लगातार 2 बार विश्व कप जीत चुकी वेस्टइंडीज को शिकस्त दी थी। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया महज 183 रन पर ऑलआउट हो गई थी। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि अब भारतीय टीम यह खिताबी मुकाबला जीत पाएगी, लेकिन गेंदबाजों ने कमाल करते हुए दिग्गज बल्लेबाजों से लैस वेस्टइंडीज टीम को महज 140 रन पर समेटते हुए अपना पहला विश्व कप जीता। सफेद कपड़ों में खेले गए 1983 विश्व कप के मैच 60 ओवर्स के थे। लॉर्ड्स में खेले गए फाइनल मुकाबले में हार के बाद वेस्टइंडीज के महान कप्तान क्लाइव लॉयड ने कप्तानी छोड़ दी थी। हालांकि इसके बाद वेस्टइंडीज बोर्ड और सीनियर खिलाड़ियों ने उनसे दोबारा कप्तानी संभालने की गुजारिश की थी।
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- फोटो : social media
5. इंग्लैंड बनाम न्यूजीलैंड, 1983 विश्व कप फाइनल

जिस देश ने क्रिकेट को जन्म दिया, उसी को वर्ल्ड कप जीतने में चार दशक लग गए। वर्ल्ड कप के 12वां संस्करण इंग्लैंड और वेल्स में खेला गया। खराब अंपायरिंग और बारिश के कारण यह टूर्नामेंट विवादों में भी रहा। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच 14 जुलाई 2019 को हुआ फाइनल टाई हो गया था। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने 8 विकेट पर 50 ओवर में 241 रन बनाए। जवाब में इंग्लैंड भी 50 ओवर में 241 रन ही बना सकी। इस तरह मैच टाई हो गया। ऐसे में नतीजा सुपरओवर के लिए गया। सुपरओवर भी टाई हो गया। इंग्लैंड ने 6 गेंदों में बिना विकेट खोए 15 रन बनाए, न्यूजीलैंड भी इतने ही रन बना पाया। सुपरओवर टाई होने के बाद आईसीसी के पूर्व निर्धारित नियम के अनुसार इंग्लैंड को विजेता घोषित कर दिया गया, जिसने मैच में ज्यादा बाउंड्री लगाई थीं, इसके बाद दुनियाभर में आईसीसी के इस नियम की चौतरफा आलोचना हुई। अब यह नियम बदल दिया गया है।
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