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पढ़ें, स्पॉट फिक्सिंग में कब-कब क्या हुआ!

Thu, 22 Jan 2015 06:04 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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आज से लगभग पौने 2 साल पहले भारतीय क्रिकेट में स्पॉट फिक्सिंग और भ्रष्टाचार की खबर ने भूचाल ला दिया था, खिलाड़ी तो खिलाड़ी टीम के मालिकों पर भी संदेह जताया गया कि वे इस गेंद खेल में शामिल हैं। पूर्व टेस्ट क्रिकेटर एस श्रीसंत समेत कुछ खिलाड़ियों के इसमें शामिल होने के कारण प्रतिबंधित कर दिया गया था।
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आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग का मामला सबसे पहले 3 अप्रैल 2013 सबके सामने आया और 22 जनवरी 2015 तक इस पर फैसला आ गया। देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के अध्यक्ष को चुनाव लड़ने से रोक दिया तो चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के भविष्य को 3 सदस्यीय समिति का गठन कर दिया तो इन टीमों के भविष्य पर फैसला लेगी।

राजस्थान रॉयल्स के मालिक राज कुंद्रा और चेन्नई सुपर किंग्स के मालिक एन श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन पर भ्रष्टाचार में शामिल होने का दोषी पाया है और यही समिति भी इनकी सजा सुनाएगी।
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पिछले पौने 2 सालों में भारतीय क्रिकेट में स्पॉट फिक्सिंग को लेकर कई नए राज खुले। क्रिकेटर और खेल से जुड़े प्रशासकों के अलावा और भी कई बड़े लोगों के तार इस भ्रष्टाचार से जुड़ते दिखे। आइए, क्रिकेट जगत को बुरी तरह से झकझोर कर रख देने वाले इस घटनाक्रम के एक-एक पल पर नजर डालते हैं।

2013 में जयपुर में एक IPL मैच से हुआ शक

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के छठे चरण के दौरान 3 अप्रैल 2013 के बाद दिल्ली पुलिस को स्पॉट फिक्सिंग का पता चला। इसमें मुंबई अंडरवर्ल्ड के शामिल होने की भी जानकारी मिली। इसके बाद स्पेशल सेल ने देश भर के अनेक बुकी की फोन कॉल की टैपिंग की और सर्विलांस पर भी लगाया था।

फिक्सिंग के तार
5 मई : पुलिस की टीम जयपुर में हुए पुणे वॉरियर्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच मैच को देखा। इसमें अजीत चंदीला को बुकी से हुई बातचीत के आधार पर मैच खेलते देखा गया।

9 मई : स्पेशल सेल ने मोहाली में हुए किंग्स इलेवन पंजाब और राजस्थान रॉयल्स के मैच को देखा। इसमें भी बुकी से बातचीत के मुताबिक श्रीसंत को तौलिए की सहायता से इशारा करते और एक ओवर पर 13 रन देते हुए देखा गया।

15 मई : दिल्ली पुलिस मुंबई में राजस्थान रॉयल्स और मुंबई इंडियन के मैच को देखा। इसमें अजित चंदीला के बताए अनुसार अंकित चव्‍हाण ने गेंदबाजी की और इसके लिए उसे 60 लाख रुपये दिए गए।

2013 में स्पॉट फिक्सिंग से श्रीसंत पर लगा आजीवन बैन

15 मई, 2013 : मुंबई में राजस्थान रॉयल्स के तीन खिलाड़ी श्रीसंत, अजीत चंदीला, अंकित चह्वाण को गिरफ्तार किया।
24 मई, 2013 : बीसीसीआई के अध्यक्ष और चेन्नई सुपर किंग्स के मालिक एन श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन गिरफ्तार।
30 मई, 2013 : दिल्ली पुलिस का खुलासा, श्रीसंत ने एक मैच के फिक्सिंग के लिए करीब 60 लाख रुपये का सौदा किया।
4 जून, 2013 : श्रीसंत, चंदीला और अंकित समेत 26 अभियुक्तों के खिलाफ मकोका लगा।
5 जून, 2013 : राजस्थान रॉयल्स के मालिक राज कुंद्रा से दिल्ली पुलिस ने 12 घंटे तक पूछताछ की।
6 जुलाई, 2013 : बीसीसीआई ने फिक्सिंग में आरोपी हरमीत सिंह को निलंबित किया।
16 जुलाई, 2013 : दिल्ली पुलिस ने दाऊद इब्राहिम की बातचीत की रिकाडिंग अदालत को सुनवाई।
28 जुलाई, 2013 : बीसीसीआई की जांच कमेटी ने गुरुनाथ मयप्पन और राज कुंद्रा को क्लीन चिट दी।
30 जुलाई, 2013 : बांबे हाईकोर्ट ने बीसीसीआई की ओर से गठित जांच समिति को अवैध और असंवैघानिक करार दिया।
30 जुलाई, 2013 : दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट दाखिल किया जिसमें पूरा खेल डॉन दाऊद इब्राहिम और उसके करीबी छोटा सकील के इशारे पर चल रहा था। दाऊद, छोटा शकील, श्रीसंत, चंदीला समेत 39 लोगों को आरोपी बनाया।
13 सितंबर, 2013 : बीसीसीआई ने श्रीसंत और अंकित चव्हाण पर आजीवन प्रतिबंध व अमित सिंह पर पांच साल और सिद्घार्थ त्रिवेदी पर एक साल का प्रतिबंध लगाने का फैसला किया।
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जांच के लिए निर्णायक साबित हुआ 2014 का साल

2013 में स्पॉट फि‌क्सिंग मामले के सामने आने के बाद 2014 में इसकी जांच में तेजी आई। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सख्त रवैया अपनाया और मुद्गल समिति रिपोर्ट सामने आई। जानिए 2014 में क्या-क्‍या हुआ।

10 फरवरी, 2014 : मुद्गल समिति ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा की गुरुनाथ मयप्पन की भूमिका और उनके खिलाफ सट्टेबाजी के आरोप तथा सूचना लीक करने के आरोप साबित हुए हैं। राज कुंद्रा के खिलाफ गहन जांच की जरूरत है। फिक्सिंग के आरोपों की आगे जांच की आवश्यकता है।
27 मार्च, 2014 : श्रीनिवासन जांच होने तक बीसीसीआई के अध्यक्ष पद से हटाए गए।
28 मार्च, 2014 : श्रीनिवासन को अध्यक्ष पद से हटाकर उनकी जगह सुनील गावस्कर को अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
16 अप्रैल, 2014 : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, रिपोर्ट में श्रीनिवासन का भी नाम है, अत: वह कोई जिम्मेदारी नहीं निभा सकते।
3 नवंबर, 2014 : जस्टिस मुकुल मुद्गल कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपी।
14 नवंबर, 2014 : मुद्गल समिति की रिपोर्ट के नामों का खुलासा, 13 नामों में एन श्रीनिवासन, मयप्पन और राज कुंद्रा के नाम भी।
17 नवंबर 2014 : मुद्गल समिति ने श्रीनिवासन को फिक्सिंग का दोषी नहीं माना। लेकिन, कहा कि श्रीनिवासन सहित बीसीसीआई के चार अधिकारियों ने फिक्सिंग की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की।
21 नवंबर 2014 : श्रीनिवासन ने कोर्ट से पुन: बीसीसीआई अध्यक्ष बहाल करने का अनुरोध किया।
24 नवंबर 2014 : सुप्रीम कोर्ट ने श्रीनिवासन से बीसीसीआई अधिकारी और आईपीएल टीम मालिक के रूप में अपनी भूमिका बताने को कहा।
27 नवंबर 2014 : सुप्रीम कोर्ट ने माना, चेन्नई सुपर किंग्स को तुरंत आईपीएल से हटाया जा सकता है।
9 दिसंबर 2014 : सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई द्वारा दोषियों के खिलाफ सजा के लिए उठाए जाने वाले चार कदमों के प्रस्ताव को ठुकराया।
10 दिसंबर 2014 : श्रीनिवासन ने कोर्ट से बीसीसीआई चुनाव लड़ने की अनुमति मांगी।
17 दिसंबर 2014 : बीसीसीआई ने सुनील गावस्कर, रवि शास्त्री और सौरव गांगुली सहित कुछ खिलाड़ियों की सूची कोर्ट को यह कहते हुए सौंपी कि इनका आईपीएल और चैंपियंस लीग टी-20 में व्यावसायिक हित है।
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