भारत के 2011 में इंग्लैंड दौरे में मेजबान बल्लेबाज इयान बेल ने सोचा कि गेंद डेड हो गई है। वह क्रीज से बाहर आ गए लेकिन अंपायर ने तब ओवर समाप्ति की घोषणा नहीं की थी। गिल्लियां उड़ा दी गई। नियमत: बेल आउट थे लेकिन धोनी और उनकी टीम का मानना था कि बेल से अनजाने में ऐसा हुआ और फिर वह कोई रन लेने का प्रयास भी नहीं कर रहे थे। बेल ने पारी जारी रखी। भारत यह मैच हार गया था।
बात 1989 में लाहौर वनडे की है। कृष्णामाचारी श्रीकांत को वकार यूनुस की गेंद पर गलत एलबीडब्ल्यू दे दिया गया था। श्रीकांत को यकीन था कि वह आउट नहीं हैं। वह बड़े दुखी मन से पवेलियन लौट रहे थे। पाक कप्तान इमरान ने अंपायर से बात कर उन्हें वापस बुलाया। वो बात अलग है कि अगली गेंद पर वह विकेट के पीछे लपके गए।
ऑस्ट्रेलिया में 2012 में श्रीलंका के बल्लेबाज लाहिरू थिरिमाने को गैर बल्लेबाजी छोर पर गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन ने गेंद फेंकने से पहले क्रीज से बाहर जाने पर ‘मांकडिंग रन आउट’ कर दिया। नियमानुसार बल्लेबाज आउट था लेकिन कार्यवाहक कप्तान वीरेंद्र सहवाग ने सीनियर साथी सचिन से विमर्श कर अश्विन की रनआउट की अपील वापस ले ली।
त्रिकोणीय सीरीज के 2006 में हुए फाइनल में सचिन तेंदुलकर को विकेट के पीछे आउट दे दिया गया था जबकि गेंद उनके कंधे को छूकर गई थी। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग और उनकी टीम ने विचार-विमर्श के बाद अंपायरों से उन्हें वापस बुलाने का आग्रह किया लेकिन वह ज्यादा बड़ी पारी नहीं खेल सके थे।
जिंबाब्वे के खिलाफ 2012 में न्यूजीलैंड के स्पिनर डेनियल विटोरी गैर बल्लेबाजी छोर पर मैल्कम वॉलर से टकरा गए। ऐसे में बल्लेबाज रेगिस चकाबवा को क्रीज के बीच से वापस लौटना पड़ा लेकिन विकेटकीपर ने इससे पहले उन्हें रनआउट कर दिया। विटोरी ने तुरंत अपील वापस लेने को कहा क्योंकि उनके गैर-बल्लेबाजी छोर पर खड़े बल्लेबाज के टकराने से दुविधा की स्थिति पैदा हुई थी।