मेजबान इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-3 से शर्मनाक हार के बाद अब विश्व चैंपियन भारत के लिए आगामी 25 अगस्त से शुरू होने वाली पांच वनडे मैचों की सीरीज में सम्मान बचाने की बड़ी चुनौती है।
धोनी एंड कंपनी अब इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हो चुकी है कि आने वाले समय में उसके लिए चुनौतियां और ज्यादा बढ़ने वाली हैं। 2011 में इंग्लैंड दौरे पर भारत को पांच मैचों की वनडे सीरीज में 0-3 से करारी हार का सामना करना पड़ा था।
सीरीज का एक मैच टाई रहा था जबकि एक मैच बारिश से धुल गया था। रिकॉर्ड भारत के पक्ष में नहीं हैं और हालिया टेस्ट सीरीज में शर्मनाक हार के दबाव से उबरना टीम इंडिया के लिए कड़ी परीक्षा के समान होगा।
विदेश में रिकॉर्ड सुधारने की कोशिश
हालांकि टेस्ट रिकॉर्ड के इतर कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की कमान में भारतीय टीम का विदेश में प्रदर्शन अच्छा रहा है।
धोनी की कप्तानी में भारत ने विदेशी जमीन पर 99 वनडे मैच खेले हैं जिसमें से 52 जीते हैं जबकि 37 हारे हैं। तीन मैच टाई रहे हैं जबकि सात मैच बेनतीजा रहे हैं।
बात अगर 2014 में भारतीय टीम के वनडे फॉरमेट में प्रदर्शन पर करें तो परिणाम काफी अच्छे नहीं हैं। 2014 में भारत ने अब तक 12 वनडे मैच खेले हैं जिसमें से उसने छह हारे हैं और सिर्फ चार जीते हैं। वहीं एक मैच टाई रहा और एक बेनतीजा रहा।
भारत ने इस साल जिन चार मैचों में जीत दर्ज की है उसमें धोनी एंड कंपनी ने एक मैच अफगानिस्तान के खिलाफ जबकि तीन मैच बांग्लादेश के खिलाफ जीते हैं। वहीं न्यूजीलैंड के खिलाफ उसे चार मैचों में जबकि पाकिस्तान जैसी मजबूत टीम के खिलाफ एक मैच में हार का सामना करना पड़ा है।
25 अगस्त से वनडे का आगाज़
साफ है कि टेस्ट की तरह वनडे में भी टीम इंडिया इस साल प्रभावशाली प्रदर्शन नहीं कर सकी है। इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में करन शर्मा और संजू सैमसन टीम के नए चेहरे हैं।
वहीं टेस्ट की तरह वनडे में भी टीम इंडिया की जीत का दारोमदार कप्तान धोनी, विराट कोहली, अजिंक्य रहाणे, रोहित शर्मा, रविंद्र जडेजा और शिखर धवन जैसे दिग्गजों पर होगा।
टेस्ट सीरीज में धोनी को छोड़कर अन्य सभी दिग्गजों ने बेहद निराश किया। ऐसे में अब इन सभी बल्लेबाजों को पिछली असफलता भूलकर आगे देखने की जरूरत है। सुरेश रैना के आने से मध्यक्रम मजबूत होगा लेकिन पिछले एक साल में बाएं हाथ के इस बल्लेबाज का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा है।
अब देखना है कि क्या विश्व चैंपियंस वनडे में अपना सम्मान बचा पाते हैं या फिर नतीजा टेस्ट सीरीज की तरह शर्मनाक रहेगा।
टीम इंडिया ने नेट्स पर बहाया पसीना
टेस्ट सीरीज में मिली शर्मनाक हार के बाद भारतीय टीम मेजबान इंग्लैंड के खिलाफ आगामी पांच वनडे मैचों की सीरीज के लिए जी-जान से तैयारियों में जुट गई है।
इस वनडे सीरीज से पहले भारतीय टीम 22 अगस्त को मिडिलसेक्स के खिलाफ खिलाफ लॉर्ड्स में एक अभ्यास मैच भी खेलेगी।
बुधवार को भारतीय टीम ने कोच डंकन फ्लेचर और गेंदबाजी कोच जोए डेव्स की निगरानी में नेट्स पर जमकर पसीना बहाया।
हालांकि वनडे सीरीज के लिए फील्डिंग कोच ट्रेवर पैनी और गेंदबाजी कोच जोए ड्वास को छुट्टी पर भेज दिया गया है लेकिन इसके बावजूद डेव्स अभ्यास सत्र के दौरान खिलाड़ियों को समझाते हुए नजर आए। वहीं पैनी आराम के मूड में दिखाई दिए।
इस बीच वनडे सीरीज के लिए टीम डायरेक्टर बनाए गए पूर्व क्रिकेटर रवि शास्त्री इस अभ्यास सत्र के दौरान मौजूद नहीं थे। पूर्व ऑलराउंडर और वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम के सहायक कोच बनाए गए संजय बांगर और बी अरुण अभी टीम इंडिया के साथ नहीं जुड़े हैं।
मिचेल जॉनसन बड़ी चुनौती: हैरिस
इंग्लैंड दौरे पर शर्मनाक हार झेल चुकी भारतीय टीम के बल्लेबाजों को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज में तेज गेंदबाज मिचेल जॉनसन की चुनौती का सामना करना पड़ेगा जिन्होंने एशेज में इंग्लैंड को 5-0 से धूल चटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज रेयान हैरिस ने अभी से ही टीम इंडिया को आगाह किया है कि वह अपने ऑस्ट्रेलियाई दौरे में जॉनसन की आग उगलती गेंदों से जुझने के लिए तैयार रहे। भारत को पिछले ऑस्ट्रेलियाई दौरे में 0-4 की करारी हार झेलनी पड़ी थी।
हैरिस ने कहा कि भारतीय टीम अपने मैदान के बाहर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती है और जब हम उनका घरेलू परिस्थितियों में सामना करेंगे तो हमें उसका फायदा मिलेगा। जॉनसन इस समय जिस तरह से खेल रहे हैं उससे वह भारत के खिलाफ सीरीज तक और भी बेहतर हो जाएंगे।
34 वर्षीय हैरिस ने साथ ही कहा कि विराट कोहली के लिए भी उनके पास अलग से रणनीति है।