sachin tendulkar, rahul dravid, sourav ganguly
सुनील गावस्कर के साथ बतौर ओपनर अंशुमन गायकवाड़ ने बिना हेलमेट के माइकल होल्डरऔंग, एंडी राबट्र्स, सिल्वेस्टर क्लार्क जैसे तेज गेंदबाजों का सामना किया है, लेकिन बीसीसीआई की ओर से कर्नल सीके नायडू लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड के लिए चुने गए गायकवाड़ को अपने कैरियर में बैटिंग नहीं बल्कि कोचिंग सबसे कठिन काम लगा है। लगे भी क्यों नहीं जिस टीम में सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड, अनिल कुंबले, सौरव गांगुली, जवागल श्रीनाथ, वेंकटेश प्रसाद जैसे खिलाड़ी हों उस टीम के कोच की भूमिका का अंदाजा लगाया जा सकता है।
गायकवाड़ साफ करते हैं कि जब वह भारतीय टीम के कोच बने तो इन क्रिकेटरों का विश्वास हासिल करने में ही उन्हें छह माह लग गए थे। एक बार जब विश्वास हासिल किया तो उनकी कोचिंग में टीम इंडिया ने सबसे ज्यादा कारनामे करके दिखाए। यही कारण है कि गायकवाड़ की नजरों में एक क्रिकेटर से ज्यादा उनके लिए कोचिंग कठिन काम था।