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सचिन-गांगुली की जोड़ी: तेंदुलकर की वो सलाह, जिसने सौरव गांगुली को ओपनर बना दिया

Fri, 12 Mar 2021 03:31 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली
सचिन-सौरव की जोड़ी इंटरनेशनल क्रिकेट की सबसे बड़ी जोड़ी मानी जाती है। दोनों ने मिलकर भारतीय क्रिकेट टीम को कई नाजुक मैच जिताए। विपरित हालातों से टीम को उबारा और कई रिकॉर्ड बनाएं। दोनों जब साथ में बल्लेबाजी करते थे तो स्कोरबोर्ड टैक्सी की मीटर की तरह भागता था। सचिन-सौरव दोनों क्रिकेट के शुरुआती दिनों से ही दोस्त थे। एक वक्त ऐसा भी आया था, जब सचिन ने गुस्से में सौरव गांगुली को उनका करियर खत्म कर देने की धमकी दे डाली थी, लेकिन यह भी सच है कि 'दादा' को ओपनर बनाने वाले भी तेंदुलकर ही हैं।
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राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर के साथ सौरव गांगुली - फोटो : सोशल मीडिया
इसका खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि खुद बीसीसीआई के मौजूदा अध्यक्ष सौरव गांगुली ने ही किया। 'प्रिंस ऑफ कोलकाता' ने 1996 में अपना पहला इंटरनेशनल मैच खेला था। लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर उन्होंने टेस्ट शतक से डेब्यू किया था। वन-डे ओपनर बनने से पहले वह 10 एकदिवसीय मैच खेल चुके थे। इसी साल खेले गए टाइटन कप त्रिकोणीय सीरीज के शुरुआती दो मुकाबलों में उन्होंने मध्यक्रम में बल्लेबाजी की। 31 और 4 रन बनाने के बाद अगले मैच में गांगुली को सचिन के साथ ओपनिंग का मौका मिला, फिर जो हुआ वो इतिहास में दर्ज है। 
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सौरव गांगुली - फोटो : Getty
एक निजी चैनल से बातचीत करते हुए गांगुली ने बताया, 'ओपनिंग करने से पहले मैं मध्य क्रम में खेलता था। सचिन मेरे पास आए और उन्होंने कहा कि तुम टेस्ट में नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने आते हो तो वन-डे में पारी की शुरुआत क्यों नहीं करते। मैंने उनकी सलाह मांगी और तब से मैं ओपनर बन गया।' उस मैच में भारत की ओपनिंग जोड़ी ने पहले विकेट के लिए 126 रन जोड़े थे। सचिन-गांगुली दोनों ने अर्धशतक जमाए हालांकि भारत दक्षिण अफ्रीका से वह मैच नहीं जीत सका।

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सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली
अब भारत को एक नई सलामी जोड़ी मिल चुकी थी। सचिन-सौरव के नाम से ही दुनियाभर के गेंदबाज थर्राने लगे। इस जोड़ी ने भारत के लिए 136 बार पारी की शुरुआत की। 21 शतकीय और 23 अर्धशतकीया साझेदारियां की। 49.32 की बेहतरीन औसत से 6609 रन जोड़े। वो सचिन ही थी, जिनकी बदौलत भारत को गांगुली के रूप में एक सर्वकालिक महान कप्तान मिल पाया।
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सौरव गांगुली-रवि शास्त्री - फोटो : सोशल मीडिया
साल 2000 में टीम बुरी तरह संघर्ष कर रही थी। ऑस्ट्रेलिया दौरे में खेले गए कुल 14 मैच में मिली 13 हार ने सभी को हौसला तोड़ दिया था। तब कप्तान सचिन ने कप्तानी छोड़ी और गांगुली को जिम्मेदारी सौंपी गई। उस वक्त कोई सोच भी नहीं सकता था कि सचिन के अलावा कोई और भारत का क्रिकेट कप्तान बन सकता है, लेकिन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू वन-डे सीरीज में टीम इंडिया को एक नया कप्तान मिल चुका था।
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