मेलबर्न टेस्ट ड्रॉ कराने के साथ ही कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया।
चार मैचों की टेस्ट सीरीज के शुरुआती दोनों मैच हारकर टीम इंडिया पहले ही सीरीज जीतने की रेस से बाहर हो चुकी थी। कप्तान धोनी की अगुवाई में टीम इंडिया का विदेशी धरती पर बेहद खराब प्रदर्शन रहा था।
मेलबर्न टेस्ट मैच ड्रॉ कराने के बाद बीसीसीआई ने धोनी के हवाले से उनके टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की जानकारी दी। धोनी के इसी मैच के साथ ही संन्यास लेने पर सीरीज के अंतिम टेस्ट मैच की कप्तानी एक बार फिर विराट कोहली के हाथों में आ गई है। कोहली ने एडिलेड में खेले गए पहले मैच में भारतीय टीम की अगुवाई की थी। हालांकि भारत वह मैच हार गया था।
हालांकि ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि इस सीरीज के बाद धोनी से टेस्ट मैच की कप्तानी छीनी जा सकती है, लेकिन उन्होंने समय रहते संन्यास ले लिया।
2008 में बने थे टेस्ट टीम के कप्तान
टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने टेस्ट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। बुधवार को मेलबर्न टेस्ट ड्रॉ कराने के बाद धोनी के अचानक संन्यास के ऐलान ने सभी को सन्न कर दिया है। हालांकि विदेशी दौरो में टेस्ट कप्तान के तौर पर लचर प्रदर्शन के चलते उनकी काफी आलोचना भी जा रही थी।
कुल 90 टेस्ट मैच खेल चुके धोनी ने दिसंबर 2005 श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट में आगाज किया था। विकेटकीपर के तौर पर उन्होंने अपने पहले मैच में 30 रन बनाए थे।
2008 में उन्हें टेस्ट टीम का कप्तान बनाया गया। भारत में हुए टेस्ट मैचों में 2008 से 2013 के दौरान उन्होंने 30 मैचों में से 21 में भारत को विजय दिलाई थी। इसके अलावा 2009 से 2014 के बीच विदेशी दौरों में धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया 2009 से 2014 के बीच 26 मैचों में से 6 में ही जीत हासिल कर पाई। जबकि 12 मैचों में हार का सामना करना पड़ा।
लगातार हार के बाद पूर्व क्रिकेटरों द्वारा कई बार धोनी की टेस्ट कप्तानी को लेकर आलोचना भी हुई। उन्हें टेस्ट में कप्तानी के बारे में कई पूर्व दिग्गज क्रिकेटर अंगुली उठा चुके हैं।
अपने अंतिम टेस्ट मैच में भी धोनी ने बनाए 2 रिकॉर्ड
कप्तान धोनी के मेलबर्न टेस्ट के बाद टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के साथ ही यह उनका आखिरी टेस्ट मैच साबित हो गया। इस मैच में उन्होंने 2 और रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए।
बतौर विकेटकीपर उन्होंने इस मैच में कुल 9 बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई जो किसी भारतीय विकेटकीपर का यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। पहली पारी में उन्होंने 5 बल्लेबाजों (4 कैच और एक स्टम्पिंग) को अपना शिकार बनाया था। दूसरी पारी में धोनी ने 4 कैच लपके थे।
इसके बाद उन्होंने मैच के पांचवें दिन के अंतिम क्षण में संघर्षपूर्ण बल्लेबाजी कर भारत को हार के मुंह से बाहर निकाला। अपनी अंतिम पारी में वह 24 रन बनाकर नाबाद रहे। इस दौरान उन्होंने बतौर कप्तान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने 10 हजार रन भी पूरे कर लिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब तक 10018 रन बनाए हैं।
ऐसा करने वाले वे भारत के पहले कप्तान हैं जबकि दुनिया के पांचवें। धोनी से पहले रिकी पोंटिंग, ग्रीम स्मिथ, स्टीफन फ्लेमिंग और एलन बॉर्डर ही इस उपलब्धि को हासिल कर सके थे।
17 साल बाद मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) में कोई टेस्ट मैच ड्रॉ हुआ है। इससे पहले 1997 में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच मैच ड्रॉ हुआ था।