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सुशील दोशी की कलम से: न्यूजीलैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में भारतीय टीम की असली परीक्षा, टॉस की होगी अहम भूमिका

सार

भारत का मुकाबला विश्व कप के सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड से है। दोनों टीमें चार साल बाद एक बार फिर से अंतिम-4 के मुकाबले में आमने-सामने होंगी। इस मैच को लेकर प्रसिद्ध कमेंटेटर सुशील दोशी ने अपनी राय रखी है।
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सुशील दोशी की कलम से - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नमस्कार! मैं सुशील दोशी आपका स्वागत करता हूं। मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम आज के बहुत ही महत्वपूर्ण मैच का गवाह बनेगा। ये विश्व कप के सेमीफाइनल का मुकाबला है। भारत का मैच शक्तिशाली न्यूजीलैंड से है। भारतीय टीम की लय तो बहुत ही अच्छी है। उसने लगातार सभी नौ मैच जीते और लगता है कि वही विश्व चैंपियन बनकर रहेगी। लेकिन क्रिकेट का मुकाबला है और वह भी विश्व कप का मुकाबला। इसमें न केवल आपकी कुशलता, न केवल तकनीकि योग्यता बल्कि आपकी मानसिक दृढ़ता की भी परीक्षा होती है।
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भारतीय टीम अब तक परीक्षा में सही गुजरी है। अब तक उन्होंने जीत की लय बरकरार रखी है। वही लय वो बरकरार रखना चाहेंगे, लेकिन सवाल ये है कि क्या न्यूजीलैंड को परास्त कर पाएंगे? पिछली बार भी 2019 में ऐसा हुआ था। भारत ने लीग राउंड में शानदार प्रदर्शन किया था, लेकिन न्यूजीलैंड ने सेमीफाइनल में भारत को हरा दिया था। क्या भारत उस हार का बदला ले पाएगा?

न्यूजीलैंड की बल्लेबाजी भी काफी मजबूत है। डेवोन कॉन्वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के सफल खिलाड़ी हैं। उन्होंने विश्व कप के पहले मैच में शतक लगाया था। बाद में आउट ऑफ फॉर्म हो गए थे, लेकिन पिछले मैच में फिर से अच्छा प्रदर्शन किया। विल यंग उनके साथ ओपनिंग करते हैं और तेज गति से बल्लेबाजी कर सकते हैं। उनके बाद केन विलियम्सन हैं। वह विराट कोहली की श्रेणी के ही बल्लेबाज हैं। विलियम्सन टीम को स्थायित्व प्रदान करते हैं। उनके बाद डेरिल मिचेल तो आक्रामक प्रहार करने वाले बल्लेबाज हैं। वह खेल को विरोधी की गलि में ले जाकर खेलना पसंद करते हैं। उनके बाद टॉम लाथम हैं। कुल मिलाकर न्यूजीलैंड का जो रवैया है वह काफी आक्रामक है। बल्लेबाजी उनकी भारत की तरह ही ताकतवर है।
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दूसरी ओर, उनकी गेंदबाजी की धार काफी अच्छी है। टिम साउदी गेंद को स्विंग कराते हैं। लॉकी फर्ग्यूसन काफी तेज रफ्तार से गेंदबाजी करते हैं। ट्रेंट बोल्ट शुरुआत में विकेट उखाड़ देते हैं। न्यूजीलैंड का तेज आक्रमण भारतीय तेज आक्रमण की तरह है। भारतीय तेज गेंदबाजी की बात करें तो मोहम्मद शमी, मोहम्मद सिराज और जसप्रीत बुमराह फॉर्म हैं। जब ये गेंदबाजी करने आते हैं तो लगता है कि विकेट लेंगे। इनको ये विश्वास है कि शुरुआत में ही ये विकेट झटक सकते हैं। 10 ओवर में अगर दो-तीन विकेट उखाड़ लिए तो ये मैच जीतना आसान होगा। अगर विकेट नहीं ले पाए तो मुकाबला मुश्किल होगा और सारा दारोमदार बल्लेबाजों पर आ जाएगा।

न्यूजीलैंड के स्पिनर मिचेल सेंटनर सही इलाके में गेंद रखते हैं। भारतीय स्पिन आक्रमण न्यूजीलैंड के स्पिन आक्रमण से थोड़ा बेहतर हैं। कुलदीप यादव बहुत अच्छी गेंदबाजी कर रहे हैं। वह लगातार विकेट ले रहे हैं। उनकी गुगली, चाइनामैन और टॉप स्पिन को बल्लेबाज समझ नहीं पा रहे हैं। रवींद्र जडेजा तो रन देते ही नहीं। सही इलाके में गेंद करते रहते हैं। ज्यादा फ्लाइट करते हैं तो बल्लेबाजों को समय नहीं मिलता है। उनके ओवर तेजी से गुजर जाते हैं, लेकिन एक बाद याद रखनी चाहिए। सीमित ओवरों में आप बल्लेबाजों को तभी खामोश रख पाएंगे जब आप विकेट लेते रहेंगे। अगर विकेट नहीं लिए तो स्पिनर्स की भी धुलाई हो जाती है।

मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में गेंदबाजों को भी मदद मिलती है। शुरुआत में जो टीम बल्लेबाजी करती है न उसको फायदा होता है। जब बाद में जो टीम रन चेज करने आती है तो उसे फ्लड लाइट में मुश्किल आती है। टॉस की भी काफी भूमिका होती है। इतने सारे रहस्यमय बिंदु इस मैच में है। आज सभी रहस्यों पर से पर्दा उठेगा। देखते हैं कौन सी टीम विजेता बनेगी। उम्मीद करते हैं कि भारत दीपावली के बाद फिर से दीप जलाने का मौका देगी और फाइनल में पहुंचकर ही दम लेगी।
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