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सुरेश रैना के बस की बात नहीं हैं टेस्ट क्रिकेट

Sat, 10 Jan 2015 12:51 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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बाएं हाथ के बल्लेबाज सुरेश रैना का अंतरराष्ट्रीय करियर लगभग 10 साल पुराना है। उन्होंने 30 जुलाई, 2005 को दांबुला में श्रीलंका के खिलाफ वनडे मैच खेलकर अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज किया था। तब से लेकर वह 203 और 44 ट्वंटी-20 मैच भी खेल चुके हैं।
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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले हर क्रिकेटर की ख्वाहिश होती है कि उसे टेस्ट क्रिकेट में भी खेलने का मौका मिले और सफलता हासिल करे। भले ही यह 5 दिन चलने वाला यह प्रारूप वनडे और टी-20 की तुलना में ज्यादा लोकप्रिय न हो लेकिन समीक्षक टेस्ट को ही असली क्रिकेट मानते हैं।

यही कारण है कि रैना भी अन्य क्रिकेटरों की तरह टेस्ट में भी कामयाबी का स्वाद चखना चाहते हैं। रैना को 5 साल बाद 2005 में जब टेस्ट क्रिकेट में उतरने का मौका मिला तो उन्होंने अपने पहले ही मैच में शतक ठोंक दिया और यह मैच विदेशी धरती पर खेला गया था। हालांकि यही शतक उनका अब तक का एकमात्र शतक होकर रह गया है।
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वनडे और टी-20 क्रिकेट में तो वह खासे सफल हैं लेकिन टेस्ट उनके बस की बात नहीं लगती है। कम से कम सिडनी टेस्ट के बाद तो यह तय हो ही गया। मध्य क्रम में बल्लेबाजी करने आए रैना दोनों ही मौकों पर शून्य पर आउट होकर टीम को मंझधार में छोड़ गए।
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गोल्डन डक के बाद ब्रॉंज डक बने रैना

वनडे और टी-20 में उनके फॉर्म को देखते हुए सुरेश रैना को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चौथे टेस्‍ट मैच में लंबे समय के बाद टीम की अंतिम एकादश में शामिल किया गया था। उन्होंने ढाई साल टेस्ट ‌क्रिकेट में वापसी की लेकिन उनकी ढाई साल पहले खेली गई आखिरी टेस्‍ट पारी और आज खेली गई आखिरी टेस्‍ट पारियों में कोई अंतर नहीं रहा, यानी कि तब भी वह शून्य पर आउट हुए थे और आज भी शून्य पर आउट हुए।

सिडनी से पहले उन्होंने अगस्त 2012 में बंगलूरू में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपना अंतिम टेस्ट मैच खेला था। उन्होंने पहली पारी में 55 रन तो बना लिए लेकिन दूसरी पारी में वह खाता खोला बगैर ही आउट हो गए। अपनी इस अर्धशतकीय पारी से पहले भी वह बल्‍ले से लगातार संघर्ष करते दिखे। न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज से पूर्व इंग्लैंड दौरे के दौरान भी रैना मेजबान टीम के खिलाफ ओवल टेस्ट की दोनों पारियों में शून्य पर आउट हुए थे।

वहीं 2015 में सिडनी टेस्ट की पहली पारी में वह गोल्डन डक यानी पहली ही गेंद पर शून्य पर आउट हो गए थे। इसके बाद दूसरी पारी में ब्रॉंज डक यानी तीसरी गेंद पर खाता खोले बगैर ही आउट हुए।

रैना की पिछली 14 पारियों को देखा जाए तो वह इस दौरान महज 2 अर्धशतक लगा सके हैं जबकि 6 बार खाता खोलने में नाकाम रहे। इन पारियों में वह 10 बार दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके हैं।

जहां तक ओवरऑल प्रदर्शन का सवाल है तो उन्होंने 18 टेस्ट मैचों की 31 पारियों में वह सिर्फ 2 बार नाबाद रहे हैं। वह 1 शतक और 8 अर्धशतकों की बदौलत 768 टेस्‍ट रन ही बना सके हैं।
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