सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) में विवादित एक-राज्य-एक-वोट जनादेश पर पुनर्विचार करने पर सहमति जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाली राज्य क्रिकेट एसोसिएशंस को दरकिनार नहीं किया जा सकता।
उच्चतम न्यालायाय ने कहा कि बीसीसीआई का संविधान तय करते समय तीन चयनकर्ताओं के रहने पर पाबंदी नहीं लगाई गई थी। इसके अलावा कोई योग्यता भी तय नहीं की गई थी कि चयनकर्ता को कितने टेस्ट खेलना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक बीसीसीआई का संविधान तय नहीं हो जाता, तब तक कोई राज्य एसोसिएशन चुनाव रोक नहीं सकती।
बता दें कि बीसीसीआई के अधिकारी पिछले कुछ समय से सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (COA) के करीब-करीब हर मुद्दे पर उलझी हुई दिखे हैं।
दो सदस्यों (विनोद राय और डायना इडुल्जी) वाली प्रशासनिक समिति (COA) ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी 7वीं स्टेटस रिपोर्ट में बोर्ड के अधिकारियों के चयन के लिए चुनाव की सिफारिश की, जिससे बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष सीके खन्ना, कार्यकारी सचिन अमिताभ चौधरी और ट्रेजर अनिरुद्ध चौधरी का कार्यकाल खत्म किया जा सके।
अपनी इस स्टेटस रिपोर्ट में CoA ने कोर्ट को बताया है कि बीसीसीआई के संविधान के मुताबिक इन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। सीओए ने कोर्ट से ये भी सिफारिश की है कि वो लोढ़ा समिति की सिफारिशों के तहत नया संविधान नहीं अपनाने तक AGM पर भी निर्देश दे।
बता दें कि मौजूदा दौर में बीसीसीआई के अधिकारियों और सीओए के संबंध बेहद कटु अनुभव वाले हो चुके हैं। ज्यादातर मौकों पर दोनों एक-दूसरे के खिलाफ ही रहते हैं।