ऐसे में गुदड़ी के लाल अथर्व अंकोलकर ने आठ ओवर्स में 28 रन देते हुए पांच अहम विकेट झटके। नतीजतन बांग्लादेश को रोमांचक मुकाबले में 5 रन से हार का सामना करना पड़ा।
मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के कुछ सदस्य और दोस्तों की माने तो अथर्व की कामयाबी के पीछे उनकी मां वैदेही की ही लगन है। आज के दौर में भी बस कंडक्टर जैसे कार्य को भारत में महिलाओं के लिए कठिन ही माना जाता है। अथर्व की आज की सफलता उनकी मां वैदेही की इन्हीं चुनौतियों पर जीत की कहानी है।
वैदेही की ड्यूटी मारोल बस डिपो पर हैं और वह बस नंबर 186 (अगरकर चौक से विहार लेक) और 340 (घाटकोपर स्टेशन से अगरकर चौक) में कार्यरत हैं। 26 सितंबर 2000 को जन्में अथर्व के पिता विनोद BEST (बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट) में कंडक्टर थे।
परिवार में वे इकलौते कमाने वाले थे। पति की मौत के बाद पूरे परिवार पर दो वक्त की रोटी भी भारी पड़ रही थी। ऐसे में वैदेही ने दोस्त की मदद से ट्यूशन देना शुरू किया। बाद में उन्हें अपने पति की जगह कंडक्टर की नौकरी मिल गई।
बाएं हाथ के स्पिनर अथर्व मुंबई के रिजवी कॉलेज में सेकेंड ईयर के छात्र हैं। खिताबी मुकाबले में जीत के लिए 107 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरे बांग्लादेश की खराब शुरुआत के बाद कप्तान अकबर अली (23) और मृत्युंजय चौधरी ने (21) उम्मीदें बनाई, लेकिन दोनों जल्दी पविलियन लौट गए।
इसके बाद तंजिम हसन शाकिब (12) और रकिबुल हसन (नाबाद 11) ने 9वें विकेट के लिए 23 रन जोड़कर एक बार फिर भारत को परेशानी में डाल दिया, लेकिन अंकोलेकर ने चार गेंद के अंदर आखिरी के दोनों विकेट चटकाकर भारत को जीत दिला दी। भारत के लिए कप्तान ध्रुव जुरेल (33) और निचले क्रम के बल्लेबाज करण लाल (37) ही बल्ले से योगदान दे सके।
अथर्व आज भी अपने पिता को काफी याद करते हैं। बकौल अथर्व जब वह छोटे थे तब पिता उनके बिस्तर के पास क्रिकेट बैट रख देते थे। अच्छा खेलने पर क्रिकेट का बाकी सामान भी लाकर देते थे। अब यह सब काफी याद आता है। अथर्व का सपना कड़ी मेहनत करके टीम इंडिया के लिए खेलना सपना है। नौ साल पहले अथर्व ने एक प्रैक्टिस मैच में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को आउट कर दिया था। इस वाकये ने उन्हें काफी वाहवाही दिलाई थी। बाद में सचिन ने उन्हें ऑटोग्राफ वाले ग्लव्स गिफ्ट किए थे।