खिताब जीतने के बाद सिंधु के मुंह से धन्यवाद के लिए किम जी ह्यून और गोपीचंद का नाम निकला। वाकई यह हिरोशिमा एशियाड में टीम का गोल्ड जीतने वाले कोरियाई किम थीं जिन्होंने इस साल सिंधु के खेल में कमियों को दूर करने का बीड़ा उठाया। लंबी कद काठी की होने के कारण सिंधु के नेट पर खेल का उनके विरोधी हमेशा फायदा उठाते रहे हैं। किम ने उनके नेट पर खेल को न सिर्फ सुधारने में कोशिश की बल्कि उनके मुख्य हथियार आक्रमण को और पैना किया। यही कारण था कि सिंधु ने फाइनल में 358 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से स्मैश जड़ा।
बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने शटलरों की ट्रेनिंग के लिए दो इंडोनेशियाई स्पारिंग पार्टनर हेरी सेतियावन और एडी कुर्नियावन को अनुबंधित किया। दोनों ज्यादातर पुरुष शटलरों को ट्रेनिंग कराते हैं, लेकिन सिंधु को ट्रेनिंग कराने के लिए सेतियावान को लगाया गया। सिंधू एक पुरुष शटलर के साथ अभ्यास कर खुद को तैयार कर रही थीं।
सिंधु की फिटनेस के लिए वरदान बन गए श्रीकांत
सिंधु को उनकी फिटनेस परेशान करती रही है। वॉलीबॉल में देश की टीम के कप्तान रहे उनके पिता पीवी रमन्ना ने इसके लिए फिजिकल कंडीशनिंग और स्ट्रेंग्थनिंग विशेषज्ञ एम श्रीकांत का सहारा लिया। श्रीकांत गोपी अकादमी से बाहर थे, लेकिन सिंधु उनके पास भी जाती रहीं। यह श्रीकांत ही थे जिन्होंने सिंधु की फिटनेस को उनका मुकाम दिला दिया। सिंधु ने आने वाले टूर्नामेंटों के लिए साई से श्रीकांत की सेवाएं भी मांगी हैं।