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पुरुषों के साथ की प्रैक्टिस, विश्व चैंपियनशिप के लिए अंतिम क्षणों में सिंधु ने किए कई त्याग

Mon, 26 Aug 2019 07:30 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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पीवी सिंधु - फोटो : social media
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आखिर पीवी सिंधु ने विश्व चैंपियन बनकर फाइनल फोबिया को पीछे छोड़ ही दिया। पिछले तीन वर्षों में दो विश्व चैंपियनशिप के फाइनल, ओलंपिक और राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में हार के बाद सिंधु को विश्व खिताब यूं ही नसीब नहीं हुआ। इस विश्व चैंपियनशिप के लिए वह अपनी तैयारियों के हर पक्ष पर विजय पाना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने गोपीचंद अकादमी में विदेशी पुरुष स्पारिंग पार्टनरों (ट्रेनिंग कराने वाले बैडमिंटन खिलाड़ी) से न सिर्फ लगातार अभ्यास किया बल्कि अपने को फिट रखने के लिए उन्होंने गोपी अकादमी से बाहर का भी सहारा लिया। विश्व खिताब के अभियान में कहीं कमी न रह जाए इस लिए सिंधु ने इसी माह बैंकाक में हुई थाईलैंड ओपन सुपर सीरीज से भी अंतिम क्षणों में नाम वापस ले लिया।

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किम ने कमजोरियों को किया दूर

पीवी सिंधु - फोटो : सोशल मीडिया
खिताब जीतने के बाद सिंधु के मुंह से धन्यवाद के लिए किम जी ह्यून और गोपीचंद का नाम निकला। वाकई यह हिरोशिमा एशियाड में टीम का गोल्ड जीतने वाले कोरियाई किम थीं जिन्होंने इस साल सिंधु के खेल में कमियों को दूर करने का बीड़ा उठाया। लंबी कद काठी की होने के कारण सिंधु के नेट पर खेल का उनके विरोधी हमेशा फायदा उठाते रहे हैं। किम ने उनके नेट पर खेल को न सिर्फ सुधारने में कोशिश की बल्कि उनके मुख्य हथियार आक्रमण को और पैना किया। यही कारण था कि सिंधु ने फाइनल में 358 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से स्मैश जड़ा।
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सेतियावान के साथ ट्रेनिंग कर गई काम

पीवी सिंधु - फोटो : सोशल मीडिया
बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने शटलरों की ट्रेनिंग के लिए दो इंडोनेशियाई स्पारिंग पार्टनर हेरी सेतियावन और एडी कुर्नियावन को अनुबंधित किया। दोनों ज्यादातर पुरुष शटलरों को ट्रेनिंग कराते हैं, लेकिन सिंधु को ट्रेनिंग कराने के लिए सेतियावान को लगाया गया। सिंधू एक पुरुष शटलर के साथ अभ्यास कर खुद को तैयार कर रही थीं।
 

सिंधु की फिटनेस के लिए वरदान बन गए श्रीकांत

सिंधु को उनकी फिटनेस परेशान करती रही है। वॉलीबॉल में देश की टीम के कप्तान रहे उनके पिता पीवी रमन्ना ने इसके लिए फिजिकल कंडीशनिंग और स्ट्रेंग्थनिंग विशेषज्ञ एम श्रीकांत का सहारा लिया। श्रीकांत गोपी अकादमी से बाहर थे, लेकिन सिंधु उनके पास भी जाती रहीं। यह श्रीकांत ही थे जिन्होंने सिंधु की फिटनेस को उनका मुकाम दिला दिया। सिंधु ने आने वाले टूर्नामेंटों के लिए साई से श्रीकांत की सेवाएं भी मांगी हैं।
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