पुलेला गोपीचंद के मार्गदर्शन में सिंधु खास तरह से तैयारियां करती हैं। खाने-पीने की बहुत शौकीन सिंधु अपनी पसंदीदा आइसक्रीम और बिरयानी को भी छोड़ चुकी हैं। फिटनेस के लिए सिंधु ने इन सभी चीजों से दूरी बना ली है।
पीवी सिंधु का खेल देखने पर पता चलता है कि उनका सबसे बड़ा पक्ष है उनका ‘नैचुरली टैलेंटेड’ खिलाड़ी होना। शारीरिक बनावट के लिहाज से भी वो शानदार एथलीट हैं। 5 फुट 10 इंच की लम्बाई वाली सिंधु बैडमिंटन कोर्ट में दमदार शॉट लगाने से लेकर कोर्ट को कवर करने तक में माहिर हैं।
मानसिक तौर पर भी सिंधु बहुत मजबूत हैं और उनका बेखौफ होना उनकी सबसे बड़ी खूबी है। उन्हें इस बात से फर्क ही नहीं पड़ता है कि कोर्ट में उनके सामने कौन है। वे हमेशा अपना स्वाभाविक खेल खेलती हैं। सिंधु को भी इस बात की परवाह कम ही रहती है कि कोर्ट में दूसरी तरफ उनके सामने कौन है।
लगातार दो बार से वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में हार जाने वाली सिंधु ने इस बार खास तैयारी की। उन्होंने चैंपियनशिप के लिए कई दूसरे टूर्नामेंटों से अपना नाम वापस ले लिया। सिंधु ने अपनी कमियों पर काम करते हुए लगातार उन्हें मजबूत किया और वर्ल्ड चैंपियनशिप में जबरदस्त शुरुआत की। सेमीफाइनल में जीत के बाद सिंधु ने कहा 'अभी मैं संतुष्ट नहीं हूं और फाइनल में हार जाने का दाग धोना चाहती हूं।
माता-पिता दोनों वॉलीबॉल के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी थे लेकिन सिंधु भारत के स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पुलेला गोपीचंद को अपना आदर्श मानती थीं। यही वजह थी की मात्र आठ साल की उम्र में ही सिंधु ने गोपीचंद की अकादमी से जुड़ने का फैसला किया। हालांकि सिंधु के लिए ये फैसला आसान नहीं था। उन्हें गोपीचंद अकादमी और अपने आदर्श से कोचिंग लेने के लिए घर से 56 किलोमीटर दूर जाना था। लेकिन मजबूत इरादों वाली सिंधु ने अपने फैसले पर अमल करते हुए रोजाना सुबह 6 बजे 56 किलोमीटर का सफर तय कर अकादमी पहुंचना शुरू कर दिया।
गोपीचंद खुद बताते हैं कि बैडमिंटन के लिए जो जोश और जज्बा चाहिए वो सिंधु में है और वो इसके लिए पूरी मेहनत करती हैं। सिंधु ने 17 साल की उम्र में ही वर्ल्ड रैंकिंग के टॉप-20 खिलाड़ियों में जगह बनाकर सभी को हैरान कर दिया था। इसके बाद सिंधु कभी नहीं रूकीं और एक के बाद एक टूर्नामेंट जीतते चली गई।