ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ ने क्रिकेट जगत को मैच और स्पॉट के बाद ‘ब्रैकेट’ फिक्सिंग के खतरे से आगाह किया है।
वॉ ने अपनी किताब ‘द मीनिंग ऑफ लक’ में इस बात का खुलासा किया है। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने इसमें नए प्रकार की फिक्सिंग ‘ब्रैकेट’ का जिक्र किया है जो इन दिनों टी-20 मैचों में व्यापक पैमाने पर की जा रही है।
पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ने दावा किया है कि ‘ब्रैकेट’ फिक्सिंग मैच में की जाने वाली स्पॉट फिक्सिंग से कहीं अधिक खतरनाक है क्योंकि इससे बुकीज को उनके मनमुताबिक फायदा आसानी से मिल जाता है।
वॉ ने जांच के लिए खिलाड़ियों का लाई डिटेक्टर टेस्ट तक कराने की सलाह दी है। वॉ ने कहा, इन दिनों क्रिकेट को ‘ब्रैकेट’ फिक्सिंग से सबसे ज्यादा खतरा है। इसकी जांच करना बहुत मुश्किल है और कई चालाक और धोखेबाज खिलाड़ी इसे कंट्रोल कर रहे हैं।
वॉ ने कहा, ‘टी-20 क्रिकेट लीग में लगातार बढ़ती कॉरपोरेट हिस्सेदारी भी फिक्सिंग के बढ़ने की वजह है। क्योंकि इसके जरिए फ्रेंचाइजी मालिक टीम के निर्णय और उसकी रणनीति आदि को प्रभावित कर सकते हैं।’
क्या है ‘ब्रैकेट’ फिक्सिंग
वॉ के अनुसार ब्रैकेट फिक्सिंग के जरिए सीमित ओवर मैच में एक छोटे से हिस्से को प्रभावित किया जाता है जिसमें तय रन या फिर विकेट की संख्या को लेकर फिक्सिंग की जाती है। फिक्सिंग में कप्तान खुद शामिल हो तो यह पूरी प्रक्रिया काफी आसान हो जाती है।
वॉ ने अपने साथ हुई ऐसी ही एक घटना के बारे में बताया, ‘मैंने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी के तौर पर सच्चाई और ईमानदारी सीखी, लेकिन कप्तान बनने के बाद जब मुझे लगा कि मैं टीम मालिक के हाथ की कठपुतली बन जाऊंगा तो मैंने कप्तानी छोड़ दी और टीम के चार मैच भी नहीं खेले।’