हालांकि, मिश्रा ने खिलाड़ी की पहचान बताने से इंकार कर दिया। सबूत के बारे में पूछने पर मिश्रा ने कहा, 'खिलाड़ी और बुकी के बीच फोन पर बातचीत हुई थी, जो रिकॉर्ड हो चुकी थी। इसकी जांच करने में 31 अक्टूबर से ज्यादा समय लग जाता। टेलीफोन पर दो आवाजें थी। कथित तौर पर एक आवाज बुकी और एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की थी। अगर मैं जांच करता तो खिलाड़ी और बुकी की आवाजों का सैंपल लेता।'
'फिर उसे फोरेंसिक जांच के लिए भेजता। इसमें एक महीना लग जाता। और फिर मैं ऐसा क्यों करता जब यह मेरे विशेषाधिकार का हिस्सा नहीं था। अगर हमारे पास ज्यादा समय होता तो इसकी जांच जरूर करते। हमें कोई मौका नहीं मिला जब खिलाड़ी और बुकी एक-दूसरे का सामना कर रहे हो। मैंने बुकी से बात की। उसने कहा था कि खिलाड़ी से संपर्क में था।'
उन्होंने आगे कहा, 'मैं बुकी से मिली जानकारी को लेकर खिलाड़ी के सामने जाता। मगर बुकी ने सबूत नहीं दिए जबकि मुझे पता था कि सबूत हैं। मैं उसे हासिल नहीं कर पाया। मुझे सिर्फ इस मामले पर इतना पता है कि बुकी ने किसी पर विश्वास किया था। मुझे जानकारी मिली, बुकी ने मुझसे पहले इस जानकारी को स्वीकार किया। वह सबूत देना चाहता था, लेकिन अंतिम समय में उसने ऐसा नहीं करने का फैसला किया।'
मिश्रा ने अपने विशेषाधिकार के बारे में बताया, 'मुझे पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन, गुरुनाथ मयप्पन, राज कुंद्रा और सुंदर रमन पर लगे आरोपों की जांच करनी थी। मेरे ख्याल से यह बहुत ही केंद्रित और इन चार पर ध्यान देने वाली बात थी। 9 खिलाड़ियों पर लगे आरोपों पर भी ध्यान देना था।'
मिश्रा ने कहा, '9 खिलाड़ियों के खिलाफ कई आरोप लगे थे, सिर्फ एक पर नहीं। हमने दोनों की जांच की। सिर्फ चार अधिकारियों के खिलाफ की गई जांच को सार्वजनिक किया गया। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने आईपीएल भ्रष्टाचार मामले पर अपना फैसला दिया, जिसमें मिश्रा की खिलाड़ियों पर जांच भी कोर्ट में रहीं।'