आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग में अपने दामाद गुरुनाथ मयप्पन के फंसने के बावजूद बीसीसीआई की सभी आधिकारिक गतिविधियों से दूर हो गए स्वनिर्वासित अध्यक्ष एन श्रीनिवासन कुर्सी के प्रति अपने मोह को त्याग नहीं पाए।
स्पॉट फिक्सिंग में फंसे खिलाड़ियों के करियर पर फैसला लेने के लिए आयोजित अनुशासन समिति जैसी महत्वपूर्ण बैठक में न सिर्फ वह पहुंचे, बल्कि इसकी अध्यक्षता भी की।
हालांकि बैठक के मौजूद किसी भी सदस्य ने विरोध नहीं किया लेकिन कई बोर्ड सदस्यों का मानना है कि उन्हें इस महत्वपूर्ण बैठक से दूर रहना चाहिए था।
क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार ने इसे श्रीनिवासन का दोहरा चरित्र करार देते हुए कोर्ट की अवमानना का मामला दाखिल करने का फैसला लिया है।
इसके सचिव आदित्य वर्मा का कहना है कि खुद बीसीसीआई ने मुंबई हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है कि आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग में अपने दामाद गुरुनाथ मयप्पन व टीम चेन्नई सुपर किंग्स पर लगे आरोपों से बरी होने तक श्रीनिवासन बोर्ड की किसी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे।
लेकिन उन्होंने इस हलफनामे के उलट जाकर इस बैठक की अध्यक्षता की। वह इस हलफनामे को आधार बनाकर उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना का मामला दाखिल करेंगे।
हालांकि इससे पहले कोलकाता में आयोजित बोर्ड की वर्किंग कमेटी में भी श्रीनिवासन ने अध्यक्षता करने की कोशिश की थी। लेकिन बैठक शुरू होने पर उन्होंने इसकी कमान अंतरिम अध्यक्ष जगमोहन डालमिया को सौंप दी।
यह बैठक शुरू होने से पहले चर्चा थी कि अरुण जेटली इसकी अध्यक्षता करेंगे। हालांकि यह तय था कि श्रीनिवासन बैठक में शामिल होंगे। लेकिन उनके अध्यक्षता करने पर स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
बैठक शुरू होने से पूर्व ही श्रीनिवासन ने स्पष्ट कर दिया कि वह इसकी अध्यक्षता करने जा रहे हैं।
हालांकि कमेटी के दूसरे सदस्य अरुण जेटली व निरंजन शाह ने इस पर कोई एतराज नहीं जताया। लेकिन बोर्ड के दूसरे सदस्यों को श्रीनिवासन का यह निर्णय रास नहीं आया।
बैठक से बाहर होटल लॉबी में मौजूद कुछ सदस्यों ने दबी जुबान में कहा भी कि श्रीनिवासन को इस बैठक से दूर रहना चाहिए था।