फटाफट और रंगीन क्रिकेट के बूते खड़ा हुआ आईपीएल इन दिनों काफी मुश्किल दौर से गुजर रहा है। एस श्रीसंत समेत तीन गेंदबाजों से शुरू हुए स्पॉट फिक्सिंग के इस दुष्चक्र में भारतीय क्रिकेट के कई दिग्गज फंसते दिख रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने खिलाड़ियों और क्रिकेट के रहनुमाओं के लिए संकट तो पैदा किया ही, साथ ही छह साल पहले एक बेहद मजबूत ब्रांड के तौर पर शुरुआत करने वाले आईपीएल का सिंहासन भी हिला दिया है।
साल दर साल सामने आने वाले नए विवादों के कारण पिछले पांच साल में आईपीएल की ब्रांड वैल्यू में 1 अरब डॉलर की गिरावट आई थी और इस नए बवाल ने ब्रांड को तगड़ा झटका दिया है।
हाथ खींचतीं कंपनियां
हरीश बिजूर कंसल्ट्स के हेड और ब्रांड एक्सपर्ट हरीश बिजूर के मुताबिक हालिया विवाद ने आईपीएल ब्रांड को हिलाकर रख दिया है। उन्होंने कहा, 'स्पॉट फिक्सिंग कांड ने दर्शकों के मन में संदेह पैदा कर दिया है। वे खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। और कोई ब्रांड ऐसे टूर्नामेंट से जुड़ने से पहले कई बार सोचेगा, जिस पर लोगों का भरोसा नहीं है।'
2010 में इस ट्वेंटी20 लीग की ब्रांड वैल्यू 4.13 अरब डॉलर थी, जो इस साल 3.03 अरब डॉलर आंकी गई है।
बिजूर ने कहा, 'ब्रांड के रूप में दोबारा खड़ा होने के लिए आईपीएल को काफी मेहनत करनी होगी। मेरे हिसाब से एक साल ब्रेक की जरूरत है और आईपीएल का अगला सीजन 2015 में होना चाहिए। इस दौरान पूरे सिस्टम को साफ करने की जरूरत है, ताकि ब्रांड इमेज बचाई जा सके।'
1500 करोड़ दांव पर
करीब 70 एडवरटाइजर और 12 स्पॉन्सर के साथ आईपीएल के मौजूदा सीजन पर कम से कम 1500 करोड़ रुपए का दांव लगा। जानकारों का मानना है कि अगर बीसीसीआई ने इस दिशा में तुरंत गंभीर कदम नहीं उठाए, तो अगले साल से स्पॉन्सर और एडवरटाइजर मुंह मोड़ना शुरू कर देंगे।
डीएलएफ की तुलना में दोगुने दामों में आईपीएल की टाइटल स्पॉन्सरशिप खरीदने वाली पेप्सी अनुबंध पर दोबारा विचार कर रही है। इसके अलावा सहारा ग्रुप भी बीसीसीआई से ताल्लुक खत्म करने की बातें कर रहा है।
दर्शकों का भी टोटा
स्पॉट फिक्सिंग के नतीजतन दर्शक भी इस टूर्नामेंट से छिटकते दिख रहे हैं। 12 से 18 मई के बीच की टैम रेटिंग ने साफ कर दिया है कि इस कांड ने आईपीएल और दर्शकों के बीच दूरी बनाई हैं। स्पॉट फिक्सिंग का खुलासा होने के बाद आईपीएल के सातवें हफ्ते में 229 की जीआरपी के साथ सोनी मैक्स, स्टार प्लस से पांच प्वाइंट पीछे चल रहा है।
'सख्त कदमों की जरूरत'
ब्रांड विशेषज्ञों के अलावा पूर्व क्रिकेटरों का भी कहना है कि आईपीएल की साख में बट्टा लगा है। पूर्व टेस्ट क्रिकेटर मनिंदर सिंह के मुताबिक फिक्सिंग कांड की वजह से आईपीएल ब्रांड औंधे मुंह गिरा है।
लेकिन वह इस बात से सहमत नहीं कि इसे ब्रेक दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'अगर बोर्ड और मैनेजमेंट सख्ती से काम करें, तो यह कचरा दो से तीन महीने में भी साफ किया जा सकता है। पूरे सिस्टम की सफाई के बाद अगले साल आईपीएल एक बार फिर पुख्ता ब्रांड के रूप में सामने आ सकता है।'
'सब नेताओं का किया धरा'
कुछ पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि जब तक स्पोर्ट्स मैनेजमेंट में नेता घुसे रहेंगे, तब तक यह ब्रांड हर साल ऐसी ही चोट खाता रहेगा। पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद के मुताबिक बिना पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चत किए सूरत नहीं बदलेगी।
उन्होंने कहा, 'ज्यादातर देशों में स्पोर्ट्स मैनेजमेंट का काम प्रोफेशनल संभालते हैं और टेक्निकल विंग में खिलाड़ियों को जगह दी जाती है। लेकिन हमारे यहां ऐसा कुछ नहीं है, जहां नेताओं के हाथ में बागडोर है और वे सब कुछ जानते हुए भी मूकदर्शक बने रहते हैं।'
जाहिर है, आईपीएल को अब अपनी इज्जत बचाने और बनाए रखने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगाना होगा।