रिकॉर्ड किंग सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग ने स्कूली शिक्षा में खेल विज्ञान को विषय के तौर पर शामिल करने की वकालत की है। दोनों दिग्गज बल्लेबाज ने कहा कि अगर खेल जगत में चैंपियन तैयार करना है तो स्कूली स्तर पर खेल विज्ञान विषय को पढ़ाया जाना जरूरी है।
'खेल विज्ञान से बढ़ सकता है करियर'
खेल एवं फिटनेस कार्यक्रम 'स्पोर्टसमेंटर' को लांच करते हुए सचिन और सहवाग ने स्कूलों में छात्रों के लिए खेल विज्ञान विषय शुरू करने की बात कही। इस अवसर पर भारतीय हॉकी टीम के कोच माइकल नोब्स भी मौजूद थे। सचिन ने कहा, 'मैं पहले टीम के ड्रेसिंग रूप में लैपटॉप के इस्तेमाल का बड़ा प्रशंसक नहीं था लेकिन धीरे धीरे मुझे लगा कि खेल विज्ञान से मिलने वाली मदद किसी भी खिलाड़ी के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। उसे अपने पूर्व और मौजूदा प्रदर्शन के बारे में तुलनात्मक जानकारी मिली सकती है, जिससे किसी भी खिलाड़ी का करियर लंबा हो सकता है।'
सचिन ने कहा, 'भारतीय क्रिकेट टीम खेल विज्ञान का इस्तेमाल करती है। पिछले लंदन ओलंपिक में जो भारतीय दल गया था उसके प्रदर्शन में भी खेल विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।' मास्टर ब्लास्टर ने कहा कि एक पिता के रूप में मैं समझ सकता हूं कि बच्चे को कैसे गाइड किया जाए और उसे उचित मौके दिए जाएं ताकि हम भविष्य के चैंपियस तैयार कर सकें।
हाल ही में वनडे क्रिकेट से संन्यास लेने वाले सचिन ने कहा कि खेल विज्ञान का इस्तेमाल कर हम बच्चों को सही दिशा की ओर अग्रसर कर सकते हैं। उन्हें किन खेलों को अपनाना चाहिए और जिस खेल में उतरना चाहता है, उसमें वह अपना विकास कैसे कर सकता है।
'बच्चों को खुद से चुनने दें करियर'
वीरेंद्र सहवाग ने कहा, 'मैं खेलों में विज्ञान और तकनीक का इस्तेमाल करने में पूरा भरोसा रखता हूं। पिता के रूप में मेरा मानना है कि जब मैं बच्चों के स्वास्थ्य एवं रिपोर्ट कार्ड का ध्यान रखता हूं तो फिर खेल कार्ड का क्यों नहीं। मुझे भी देखना होगा कि मेरे बच्चे खेल में अपना करियर बना सकते हैं या नहीं। लेकिन यह फैसला करना उनका ही काम होगा कि वे क्या पसंद करते हैं।'
तभी तैयार होंगे सचिन, सरदार जैसे प्लेयर
कार्यक्रम में मौजूद भारतीय हॉकी टीम के कोच माइकल नोब्स ने कहा, 'मैं खुद खेल विज्ञान में बहुत दिलचस्पी रखता हूं। भारत के पास प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है लेकिन उन्हें ढूंढने की जरूरत है। मैं किंग्सटन के कोच का उदाहरण देना चाहता हूं जिन्होंने 66 ओलंपिक पदक विजेताओं के साथ-साथ विश्व का सबसे तेज धावक यूसेन बोल्ट को तैयार किया। खेल विज्ञानी और बेहतरीन कोच क्या कर सकता है यह तथ्य उसका उदाहरण है।'
हॉकी कोच ने कहा कि हमें भारत में हॉकी तथा अन्य खेलों में खेल विज्ञान को बढ़ावा देना होगा तभी हम सचिन और सरदार सिंह जैसे खिलाड़ी तैयार कर पाएंगे।