आजकल मैच के दौरान स्पाइडर कैमरा अब आम बात है। सीमारेखा के बाहर फोटोग्रॉफर तस्वीरें खींचते हैं और जिन तस्वीरों को वहां से कैद करना मुश्किल होता है, उसेके लिए स्पाइडर कैमरा काम आता है।
इस तरह पूरे मैच के दौरान यह कैमरा तार की मदद से पूरे मैदान में घूमता रहता है, जिसका नियंत्रण रिमोट द्वारा संचालित होता है। लेकिन लगता है कि दर्शकों की सुविधा और मैदान के हर एक पल को तस्वीरों में कैद करने की यह जरूरत खिलाड़ियों के लिए मुश्किल पैदा करने लगी है।
2003 में इस मॉर्डन कैमरे को पहली मर्तबा प्रयोग में लाया गया था। इसके बाद टी-20 हो या वनडे या फिर टेस्ट सभी में इन्हें प्रयोग किया जाने लगा है। लेकिन अब इस कैमरे से खिलाड़ियों हो रही दिक्कतों के बाद इसके प्रयोग पर ही सवालिया निशान किया जाने लगा है। ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट (सीए) ने भी इसके प्रयोग से खिलाड़ियों को परेशानी होने की बात कही है। आइए जानते हैं कि आखिर सीए को ऐसा क्यों कहना पड़ा।