पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली एसए20 लीग में प्रिटोरिया कैपिटल्स के मुख्य कोच के तौर पर इस भूमिका का आनंद ले रहे हैं। उन्होंने कोचिंग का मंत्र देते हुए बताया कि किस तरह कोच को खिलाड़ियों से सम्मान मिलता है। गांगुली का कहना है कि खिलाड़ियों को बेहतर बनने में मदद करने के साथ ईमानदार और पारदर्शी रहकर उनका सम्मान पाना सबसे अहम होता है।
एसए20 में गांगुली कर रहे कोचिंग
गांगुली के मार्गदर्शन में प्रिटोरिया कैपिट्स का इस सत्र के एसए20 फाइनल में पहुंचना भी उनके शब्दों को सही साबित करता है। उन्होंने कहा, ईमानदार और पारदर्शी रहना जरूरी है। यह जरूरी है कि आप सही माहौल बनाएं। खिलाड़ियों को बेहतर बनने में मदद करने की कोशिश करें और ड्रेसिंग रूम में उनका सम्मान हासिल करें। एक ग्रुप के तौर पर यही जरूरी है।
गांगुली ने कहा कि भारत के कप्तान के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान कुछ स्टार खिलाड़ियों की अगुआई करने का उनका अनुभव उनकी नयी भूमिका में काम आया। उन्होंने कहा, मैंने बहुत से महान खिलाड़ियों की कप्तानी की है और महान खिलाड़ी बहुत समझदार होते हैं क्योंकि वे सभी इस स्तर पर अच्छा करना चाहते हैं। मैं बस उनके साथ दोस्त जैसा रहता हूं, उन्हें बताता हूं कि सही तस्वीर क्या है और उन्हें वह दिखाने की कोशिश करता हूं। आखिरकार खिलाड़ी ही मैदान पर प्रदर्शन करते हैं, कोच नहीं। इसलिए कोचिंग स्टाफ के तौर पर आप उन्हें सबसे अच्छा अभ्यास देते हैं और उन्हें मानसिक रूप से अच्छी स्थिति में रखते हैं। टूर्नामेंट में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। इसलिए सही संदेश देना और उन्हें यह समझाना जरूरी है कि बेहतर होने का एकमात्र तरीका ट्रेनिंग में बार-बार चीजों को करना है।
एक कोच के तौर पर गांगुली ड्रेसिंग रूम के माहौल में खिलाड़ियों से कैसे जुड़ते हैं? गांगुली के लिए यह प्रक्रिया टूर्नामेंट से पहले टीम में औपचारिक रूप से शामिल होने से पहले ही शुरू हो जाती है।