सौरव गांगुली फुटबॉल के आज भी दीवाने हैं
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एक app के लाइव सेशन में गांगुली ने कहा, 'बात तब की है जब में नौवीं में पढ़ता था। फुटबॉल मेरी जिंदगी थी। पिता बेहद अनुशासनप्रिय थे। वह बंगाल क्रिकेट संघ से भी जुड़े हुए थे इसलिए सख्त पिता से दूर रहने के लिए मैंने कोचिंग ज्वॉइन कर ली। यह उनसे दूर रहने का अच्छा मौका था, लेकिन मुझे नहीं पता कि मेरे कोच ने मुझमें क्या देखा। मेरे कोच ने मुझे फुटबॉल से दूरी बनाने को कहा और मैं फिर क्रिकेटर बन गया।