बीसीसीआई का पूरा नाम Board of Control for Cricket in India है। यानि क्रिकेट की वह सर्वोच्च संस्था जो देश में खेले जाने वाले क्रिकेट मैच का आयोजन या उसे नियंत्रित करती है। आसान शब्दों में अगर कहें तो BCCI भारतीय क्रिकेट को पोषित करता है और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट की भागीदारी सुनिश्चित करता है।
बीसीसीआई का गठन 1928 में हुआ था। बोर्ड का मुख्यालय मुंबई में है। यही वह संस्था है, जो राज्य क्रिकेट संघों का प्रतिनिधित्व करती है और इसे इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) की भी मान्यता हासिल है। यह अजीब सी बात है कि भारत में एक स्वायत्त संस्था (या सोसाइटी, जैसा कि भारतीय कानून में बीसीसीआई है) को महज इसलिए एक खेल का आधिकारिक प्रशासक मान लिया गया है क्योंकि एक अंतरराष्ट्रीय संस्था इसकी टीम को ही भारतीय टीम की मान्यता देती है।
आईसीसी की नींव 1907 में लंदन में इम्पीरियल क्रिकेट कान्फ्रेंस के रूप में पड़ी थी, जिसके ठीक 21 साल बाद बीसीसीआई का जन्म (गठन) हुआ। साल 1965 में इम्पीरियल क्रिकेट कॉन्फ्रेंस का नाम बदलकर इंटरनेशनल क्रिकेट कॉन्फ्रेंस हो गया, जो बाद में इंटरनेशनल क्रिकेट काउंंसिल के नाम से जानी गई। आईसीसी के स्थापना काल से लेकर आज तक इसका मुख्यालय लंदन में ही है। बीसीसीआई का इंग्लिश कनेक्शन यहीं खत्म नहीं हो जाता।
बीसीसीआई के लोगों में भी इंग्लिश कनेक्शन मिलता है। इसका लोगो उस ब्रिटिश प्रतीक चिन्ह से प्रेरित है, जिसकी स्थापना 1861 में ब्रिटिश हुकूमत के साथ दोस्ती रखने वाले भारतीय राजा-महाराजाओं-युवराजों के साथ ही उन भारतीय व ब्रिटिश प्रशासकों को सम्मानित करने के लिए की गई थी, जिन्होंने ‘क्राउन’ की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
यही वह संस्था थी, जिसने विश्व में क्रिकेट को लेकर बनी-बनाई मान्यता और ढर्रे को न सिर्फ तोड़ा, बल्कि विश्व में सबसे ताकतवर और संपन्न क्रिकेट संस्था बनकर दिखा दिया। बीसीसीआई की इस उपलब्धि के पीछे कई कारण थे। एक तो भारतीय खिलाड़ी काफी अच्छा क्रिकेट खेलते थे, दूसरे देश के लाखों-करोड़ों लोगों में इस खेल के प्रति जबरदस्त दीवानगी थी।
बीसीसीआई खेलो में होने वाले प्रदर्शन के साथ-साथ खेल की भावना को सुरक्षित रखने के लिए दूसरे निगरानी जैसे काम भी करती है, जिसमें क्रिकेट के ऊपर होने वाले सट्टेबाजी को रोकना भी शामिल है और ऐसे खेल से जुड़े नियमो को भंग करने वाले खिलाड़ियों पर बोर्ड अक्सर फैसले लेती रहती है और मैच फिक्सिंग जैसे मामलो में दोषी पाए जाने पर आजीवन प्रतिबंध जैसे फैसले भी बोर्ड ही लेती है।