शुरुआती जीवन
- कोलकाता के बहेला में चंडीदास गांगुली के परिवार में सौरव का जन्म हुआ। वह कई नामों से लोकप्रिय हैं- जैसे, प्रिंस ऑफ कोलकाता, बंगाल टाइगर। गांगुली को प्यार से दादा भी कहा जाता है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सेंट जेवियर्स कॉलेजिएट स्कूल, कोलकाता से पूरी की। गांगुली बचपन में क्रिकेट से ज्यादा फुटबॉल को पसंद करते थे। हालांकि, बड़े भाई स्नेहाशीष के कहने पर सौरव ने क्रिकेट खेलना शुरू किया और इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
क्रिकेट करियर
- सौरव ने 1996 में इंग्लैंड दौरे पर दो शतक लगाकर अपनी छाप छोड़ी। इसके अलावा 1999 विश्व कप में श्रीलंका के खिलाफ उनकी 183 रन की पारी भी फैंस कभी भूल नहीं सकते। गांगुली ने हालांकि, अपने क्रिकेट करियर में कई उतार-चढ़ाव का सामना किया। कई बार उन्हें टीम से बाहर किया गया, लेकिन प्रिंस ऑफ कोलकाता ने हर बार दमदार वापसी की और साबित किया कि वह बेहतरीन बल्लेबाज हैं।
- 2003 के विश्व कप मैच के फाइनल में टीम को पहुंचाने के लिए गांगुली ने टीम का बेहतरीन नेतृत्व किया, जहां वे फाइनल में पहुंचकर कंगारूओं (ऑस्ट्रेलिया) से मैच हार गए। लॉर्ड्स के मैदान पर अपने पहले ही मैच में शतक बनाने वाले वे तीसरे बल्लेबाज थे।
निजी जीवन
- 21 फरवरी 1997 को सौरव गांगुली की शादी डोना से हुई। डोना ओडिशी नृत्यांगना रही हैं। दोनों की लव मैरिज हुई है। उनकी एक बेटी है, जिसका नाम सना है।
सौरव गांगुली
- जन्म: 8 जुलाई, 1972
- स्थान: कोलकाता, प. बंगाल
- 10 हजार से अधिक रन बना चुके हैं वे एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में अपने करियर के दौरान।
- 05 हजार से अधिक रन बनाए हैं उन्होंने टेस्ट करियर में।
- 2004 में उन्हें क्रिकेट में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
- 49 टेस्ट मैच बतौर कप्तान खेले और 21 मैचों में जीत हासिल की, जो कि एक रिकॉर्ड है।
- 34 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं ट्विटर पर सौरव के।
- 1998 में सौरव गांगुली को स्पोर्ट्स पर्सन ऑफ द ईयर का पुरस्कार मिला।
सौरव गांगुली और वीरेंद्र सहवाग
वीरेंद्र सहवाग
जन्म: 20 अक्टूबर 1978
स्थान: हरियाणा
- 2002 में उन्हें भारत सरकार ने खेलों में उत्कृष्ट योगदान के लिए अर्जुन पुरस्कार देकर सम्मानित किया।
- 319 रन पाक के खिलाफ बनाए। यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे तेज तिहरा शतक है। इसके लिए 278 गेंदें खेलीं।
- 01 करोड़ 78 लाख से भी अधिक लोग उन्हें उनके ट्विटर अकाउंट पर फॉलो करते हैं।
- 20 ओवर के मैचों में भारत के पहले कप्तान थे वीरू।
- वीरेंद्र सहवाग विश्व के सर्वश्रेष्ठ विस्फोटक ओपनर्स में से एक के रूप में जाने जाते हैं। सौरव गांगुली भी कह चुके हैं कि वीरू ने टेस्ट क्रिकेट में ओपनिंग की परिभाषा बदल दी और उनके जैसा प्रतिभावान बल्लेबाज विश्व में नहीं मिल सकता। क्रिकेट के हर फॉर्मेट में अपनी सफलता का परचम लहरा चुका यह खिलाड़ी संन्यास के बाद क्रिकेट कमेंट्री में भी हिट है।
शुरुआती जीवन
- हरियाणा के एक जाट परिवार में जन्मे सहवाग अपने माता-पिता के चार बच्चों में तीसरी संतान हैं। सहवाग से बड़ी दो बहनें मंजू और अंजू हैं जबकि उनसे छोटा एक भाई है विनोद। सहवाग के पिता किशन सहवाग बताते हैं कि वीरू को सात माह की उम्र में पहली बार उसे खिलौना बैट लाकर दिया। जब वे 12 साल के थे तब एक दिन घायल होकर घर पहुंचे तो पिता ने उसके क्रिकेट खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया। तब मां कृष्णा के हस्तक्षेप के बाद ही यह प्रतिबंध हटा।
क्रिकेट करियर
- नजफगढ़ के नवाब को 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ पहली बार टीम इंडिया की तरफ से खेलने का मौका मिला। इसके बाद 2001 में उनसे भारतीय टीम की पारी की ओपनिंग करने को कहा गया तो उन्होंने लगातार अच्छा प्रदर्शन दिखाया और टीम में अपनी जगह पक्की कर ली।
- मार्च 2010 में उन्होंने हैमिल्टन में न्यूजीलैंड के खिलाफ सिर्फ 60 गेंदों पर शतक बनाया था। टेस्ट क्रिकेट में पहले विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी का रिकार्ड भी सहवाग के ही नाम है। राहुल द्रविड़ के साथ 410 रन की साझेदारी कर वीरू ने कीर्तिमान बनाया था। वह दुनिया के एकमात्र ऐसे क्रिकेट खिलाड़ी हैं, जिन्होंने टेस्ट मैचों में दो तिहरे शतक बनाए।
निजी जीवन
- वर्ष 2004 में उनकी लव मैरिज हुई। उन्होंने आरती से शादी रचाई। उनके दो पुत्र आर्यवीर और वेदांत हैं।