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विजय मांजरेकर: वह महान भारतीय क्रिकेटर जिसने गुस्से में खिलाड़ी को चांटा मारा और नौकरी गंवा दी

Thu, 26 Sep 2019 05:34 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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विजय मांजरेकर, इनसेट में पुत्र संजय - फोटो : ट्विटर
इंग्लैंड के लिए अपने इंटरनेशनल क्रिकेट करियर की शुरुआत करने वाले महान भारतीय क्रिकेटर विजय मांजरेकर का आज जन्मदिन है। 26 सितंबर 1931 को मुंबई में पैदा हुए इस खिलाड़ी ने तकरीबन 13 साल तक टेस्ट मैच खेला। उनके बेटे संजय मांजरेकर ने भी भारतीय टीम में जगह बनाई, हालांकि बतौर बल्लेबाज उतने सफल नहीं हो पाए, लेकिन कई दशकों से कमेंट्री में सफलता के झंडे गाड़ रहे हैं।

हाल ही में संजय ने आत्मकथा लिखी, नाम है इम्परफेक्ट। इस ऑटोबायोग्राफी ने संजय ने कई मजेदार किस्से साझा किए, लेकिन अपने पिता विजय मांजरेकर और परिवार से उनके रिश्तों के बारे में पढ़कर कोई भी चौंक जाएगा। संजय को इस हिम्मत के लिए शाबासी भी देनी चाहिए।
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विजय मांजरकेर - फोटो : ट्विटर
पूर्व टेस्ट क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने बताया कि किस तरह उन्हें अपने पिता और पूर्व क्रिकेटर विजय की मौजूदगी में डर का अहसास होता था। बकौल संजय वह अपने पिता से बहुत डरते थे। दरअसल पूरा परिवार (संजय, दो बहनें और मां) ही विजय मांजरेकर से खौफ खाता था। 

जब विजय ने क्रिकेट से संन्यास लिया, तब खिलाड़ियों को इतना पैसा नहीं मिलता था। मजबूरी में नौकरी करनी पड़ी, लेकिन मैदान पर तेज गेंदबाजों के छक्के छुड़ाने वाले खिलाड़ी को डेस्क पर बैठकर बाबूगिरी नहीं सुहाई। इन सबके चलते विजय लगातार चिड़चिड़े और गुस्सैल होते गए। घर में कई बार हाथापाई की नौबत भी आई।
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विजय मांजरकेर - फोटो : ट्विटर
विजय को एक बार अंडर-19 टीम का कोच और मैनेजर बनाकर इंग्लैंड भेजा गया। उस दौरान एक मशहूर खिलाड़ी को उन्होंने तमाचा रसीद लगा दिया। मीडिया ने सीनियर मांजरेकर को आड़े हाथों लेते हुए, जमकर आलोचना की। मजबूरन बीसीसीआई को उन्हें इस पद से हटाना पड़ा। मतलब गुस्से से उनकी एक अच्छी खासी नौकरी से हाथ धोना पड़ा।

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चेतन चौहान
एक बार विजय मांजरेकर के पास चेतन चौहान पहुंचे। उस वक्त वह खराब फॉर्म से जुझ रहे थे। अपने जमाने के मशहूर बल्लेबाज और मौजूदा उत्तरप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री चौहान ने विजय मांजरेकर से पूछा, सर मेरी बल्लेबाजी में क्या खराबी है। विजय का जवाब था, खराबी तुम्हारी बैटिंग में नहीं, सेलेक्टर्स में है, जिन्होंने तुम्हें टीम में लिया।
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विजय मांजरेकर - फोटो : ट्विटर
बकौल संजय, 'पिता जी ने अपना ड्राइविंग लाइसेंस लंदन में बनवाया था। वह नियमों के बहुत पाबंद थे। जब भी कोई ट्रैफिक रूल तोड़ता या गलत कट मारता। विजय गुस्सा जाते। ओवरटेक करते और फिर कार से अपना औजार, निकालते जो वे इंग्लैंड से लाए थे। विजय इसे धमकाने के काम लाते। कई बार दोनों तरफ से झगड़ा और लात घूंसा शुरू हो जाता। मां और बहनें उन्हें दूर हटने और मामला खत्म करने के लिए समझाते रहते।
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संजय मांजरेकर
विजय का जब निधन हुआ तब संजय महज 18 साल के थे। उस वक्त तक उनका रणजी डेब्यू भी नहीं हुआ था। हालांकि विजय को भरोसा था कि बेटा एक दिन टीम इंडिया के लिए खेलेगा। विजय मांजरेकर उन चुनिंदा भारतीय बल्लेबाजों में से एक थे, जिन्हें तेज गेंदबाजों को खेलने में महारत हासिल थी। इसके बावजूद उन्होंने इंटरनेशनल करियर में तीन हजार से ज्यादा रन बना दिए थे।
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विजय मांजरेकर - फोटो : ट्विटर
मांजरेकर निचले क्रम के बल्लेबाज थे। अपने पहले मैच में वह दो रन से अर्धशतक से चूक गए थे। टीम इंडिया के लिए 55 टेस्ट मैच खेलते हुए उन्होंने  7 सेंचुरी और 15 हाफ सेंचुरी की मदद से 3208 रन बनाए हैं। उनके करियर की बेस्ट पारी इंग्लैंड के खिलाफ 189 रन की थी जो उन्होंने दिल्ली में बनाए थे। इतने रन बनाने के बावजूद मांजरेकर ने पूरे इंटरनेशनल करियर में एक भी छक्का नहीं लगाया।
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