श्रेयस अय्यर की वापसी उनके आत्म-अनुशासन, घरेलू क्रिकेट में मेहनत और दबाव में खेलते रहने की फिलॉसफी का परिणाम है। उनका प्रदर्शन दर्शाता है कि सही मानसिकता और निरंतर अभ्यास से कोई भी खिलाड़ी अपनी क्षमताओं को साबित कर सकता है। अय्यर की कहानी यह भी दिखाती है कि क्रिकेट में चुनौतियों और आलोचनाओं के बीच सफलता पाने के लिए धैर्य और मेहनत आवश्यक है।
भारत के स्टार बल्लेबाज श्रेयस अय्यर ने इस साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी शानदार वापसी को लेकर अपनी यात्रा साझा की। बीते साल बीसीसीआई के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से बाहर रहने के बाद, अय्यर ने खुद को अनुशासित करते हुए मुंबई के घरेलू क्रिकेट में खेलना जारी रखा। अब वह करीब सात महीने बाद कोई अंतरराष्ट्रीय मैच खेलते दिखेंगे। पिछला मैच उन्होंने मार्च में खेला था। श्रेयस को ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए वनडे टीम का उपकप्तान बनाया गया है। भारत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहला वनडे 19 अक्तूबर को खेलेगा।
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श्रेयस ने सिएट क्रिकेट रेटिंग्स अवॉर्ड्स में चैंपियंस ट्रॉफी में योगदान के लिए मेमेंटो प्राप्त किया। उन्होंने भारत की खिताबी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पांच पारियों में उन्होंने 243 रन बनाए। इस दौरान उनका औसत 48.60 का रहा था। श्रेयस ने दो अर्धशतक लगाए थे और उनका सर्वोत्तम स्कोर 79 रन था।
घरेलू क्रिकेट में अनुशासन और मेहनत
अय्यर ने बताया कि उनका करियर पहले अव्यवस्थित और बिखरा हुआ लग रहा था। उन्होंने कहा, 'मैंने खुद से कहा कि एक रूटीन बनाओ, खुद को अनुशासित करो और घरेलू क्रिकेट खेलो। मैं मुंबई लौटकर रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी खेला। इन सभी टूर्नामेंटों में प्रदर्शन करने से मुझे चैंपियंस ट्रॉफी के लिए आत्मविश्वास और गति मिली।' इसके साथ ही उन्होंने यह भी याद किया कि वनडे में इंग्लैंड के खिलाफ खेलना और 181 रन बनाना उनके आत्मविश्वास के लिए महत्वपूर्ण था।
दबाव में खेलने की फिलॉसफी
अय्यर ने अपनी ODI क्रिकेट की सोच के बारे में कहा, 'मैं खेलते समय परिस्थितियों को महसूस करना पसंद करता हूं और खुद को दबाव में डालता हूं। चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान मुझे शुरू में संभल कर खेलना था और फिर खुद को चुनौती देते हुए गेंदबाजों के खिलाफ आगे बढ़कर शॉट लगाना था। हमने दुबई में सोचा कि 250-300 रन जीतने के लिए पर्याप्त होंगे। मेरा काम टीम को उस स्कोर तक ले जाना था, फिर गेंदबाजों और फील्डिंग पर भरोसा करना था।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि टीम के गेंदबाजी लाइन अप और चेजिंग क्षमता पर उन्हें पूरा विश्वास था।
आलोचकों को जवाब
पिछले दो वर्षों में कई आलोचकों ने यह कहा कि अय्यर कुछ शॉट नहीं खेल सकते, खासकर शॉर्ट गेंद पर पुल शॉट। अय्यर ने इसका जवाब अपनी मेहनत और प्रदर्शन से दिया।
उन्होंने कहा, 'पिछले दो वर्षों में लोग कहते रहे कि मैं कुछ शॉट नहीं खेल सकता। जब मैं वापसी किया, तो मैंने सबको गलत साबित करने का निर्णय लिया। मैंने खुद पर काम किया, गेंदबाजों को चुनौती दी और खुद को दबाव में डालकर खुद को परखा। अभ्यास और कठिन गेंदबाजों के खिलाफ खेलना ही आत्मविश्वास बढ़ाता है।'
IPL और घरेलू सफलता
इस दौरान अय्यर ने कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के कप्तान के रूप में आईपीएल का खिताब भी जीता। उन्होंने मुंबई के लिए रणजी ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में भी नेतृत्व किया। इन सभी अनुभवों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी के लिए तैयार किया। अय्यर अब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में खेलते दिखाई देंगे। अय्यर ने अब तक ऑस्ट्रेलिया में तीन वनडे खेले हैं और 19.66 की औसत से 59 रन बनाए हैं। ऑस्ट्रेलिया में उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 38 का रहा है। हालांकि, इस साल श्रेयस ने आठ वनडे पारियों में 53.00 की औसत और 93.59 के स्ट्राइक रेट से 424 रन बनाए हैं। इनमें पांच अर्धशतक शामिल हैं। उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 79 का रहा है।