आप इंग्लैंड की धरती में क्रिकेट का लुत्फ उठाइए तो वहां आपको दर्शकों की मौजूदगी का पता तक नहीं चलेगा। इंग्लैंड के दर्शक अपनी शालीनता के लिए जाने जाते हैं। हालांकि यह नियम खिलाड़ियों पर लागू नहीं होता। जी हां, यहां हम बात कर रहे हैं क्रिकेटरों की।
पहले और अब के क्रिकेट में काफी फर्क आ गया है। पहले यह खेल सिर्फ मनोरंजन का पर्याय भर था। हार और जीत से ज्यादा खिलाड़ी का व्यवहार मायने रखता था। लेकिन अब वो बात नहीं रही। खिलाड़ियों के बीच छोटी-छोटी बात को लेकर बड़ी बहस होना अब आम हो गया है।
कई बार बहस इतनी बड़ जाती है कि अंपायर को बीच-बचाव के लिए आना पड़ता है। ऐसा एक या दो बार नहीं कई बार घटित हो चुका है।
लड़ाई में अव्वल माने जाते हैं ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी
अड़ियल और आक्रामक रवैये के लिए ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर सबसे ज्यादा बदनाम है। पूर्व कंगारू कप्तान ग्रैग चैपल सफल कप्तान होने से ज्यादा मैदान में एक लड़ाकू खिलाड़ी के रुप में ज्यादा बदनाम रहे हैं।
ताजा उदाहरण ऑस्ट्रेलिया के ही डेविड वॉर्नर का भी है। बॉर्डर-गावस्कर सीरीज के दौरान टीम इंडिया के टेस्ट कप्तान विराट कोहली और वॉर्नर के बीच काफी बहस हुई थी। वॉर्नर हर मैच में भारतीय खिलाड़ियों के साथ उलझते हुए नजर आए थे।
इसके बाद मौजूदा त्रिकोणीय सीरीज के दौरान ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के साथ इंग्लैंड और टीम इंडिया के खिलाड़ियों के बीच झगड़ा हुआ। मैदान में इस तरह के झगड़े खेल के प्रति असम्मान की भावना दिखाती है।
ऐसा न हो, इसके लिए आईसीसी हर मैच में खिलाड़ियों के व्यवहार पर कड़ी नजर रखती हैं और दोषी पाए जाने पर दंड भी देती है। कई बार खिलाड़ी मैदान में दुर्व्यवहार के चलते दंडित हो चुके है। लेकिन फिर भी यह बदस्तूर जारी है।
रेड कार्ड से खिलाड़ी सुधर जाएंगे?
मैदान में खिलाड़ियों के लगातार गलत व्यवहार के प्रति पूर्व क्रिकेटरों ने भी दुख्ा प्रकट किया है। उन्होंने राय दी है कि क्रिकेट में भी फुटबॉल की तरह रेड और येलो कार्ड होना चाहिए। ताकि खिलाड़ियों में मैच के दौरान ही बाहर होने का डर बना रहे और खेल में शालीनता बरकरार रहे।
पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर डैमियन मार्टेन ने सोशल साइट में इस बहस को शुरू किया। ट्वीट कर उन्होंने सवाल किया है कि अगर क्रिकेट में भी येलो और रेड कार्ड हो तो कैसा रहेगा?
वहीं, इंग्लैंड टीम के बल्लेबाज जोए रूट ने डेलीग्राफ अखबार को दिए एक इंटरव्यू में रोहित शर्मा और डेविड वॉर्नर के बीच हुए झगड़े को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि क्रिकेट में इस तरह की हरकतें काफी निराशाजनक है। इस तरह की हरकतें नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह क्रिकेट है न कि 'आईस हॉकी'। आपको बता दें कि 2013 में एशेज सीरीज के दौरान वॉर्नर ने बर्मिंघम स्थित एक बार में रूट पर हमला किया था।
न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान मार्टिन डेविड क्रोव ने ट्वीट करते हुए क्रिकेट में येलो और रेड कार्ड का समर्थन किया है। इसके अलावा वॉर्नर पर तंज कसते हुए उन्होंने लिखा है कि वॉर्नर को काबू करने के लिए प्रबंधन को और सख्ताई बरतनी चाहिए।
हालांकि पूर्व इंग्लिश क्रिकेटर केविन पीटरसन रेड और येलो कार्ड को क्रिकेट में लाने की बात को बकवास मानते हैं। उनके अनुसार क्रिकेट में आक्रामकता आम बात है।