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धवन के शतक से टीम इंडिया का 'किस्मत कनेक्शन'

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वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया के लिए मुसीबत बन चुके शिखर धवन को लेकर हर कोई मना रहा था कि इस बल्लेबाज को चोट लग जाए और उनकी जगह कोई दूसरा इन फॉर्म बल्लेबाज टीम से जुड़ जाए।
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हालांकि ऐसा नहीं हुआ और धवन को ही मजबूरी में सही लेकिन टीम एकादश में शामिल रखना पड़ा। रोहित शर्मा के साथ उनकी जगह टीम में ओपनिंग जोडी के लिए और कोई दूसरा बल्लेबाज नहीं दिख रहा था क्योंकि अंजिक्य रहाणे से ओपनिंग कराने की सूरत में मध्य क्रम पर असर पड़ सकता था।

लेकिन वर्ल्ड कप में धवन जिस तरह से खेल रहे हैं उससे यह लगने लगा है कि अपना बेस्ट प्रदर्शन इस टूर्नामेंट के लिए बचा कर रखा था। पहले मैच में उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने 73 रनों की पारी खेली और टीम इंडिया उसमें मैच जीत गया। इसके बाद आज उन्होंने मेलबर्न में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शतक ठोंकते हुए अपनी फॉर्म वापसी का जोरदार ऐलान किया। अफ्रीकी टीम के सामने 308 रनों का लक्ष्य कुछ भी नहीं था लेकिन धवन की इस शतकीय पारी ने टीम के साथ किस्मत कनेक्शन जोड़ दिया।
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धवन ने इस मैच में 137 रनों की पारी खेली और वर्ल्ड कप में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ किसी भी टीम की ओर से खेली गई सबसे बड़ी पारी भी है। इस शतक की बदौलत भारत ने यह मैच 130 रनों के बड़े अंतर से जीत लिया जो वर्ल्ड कप में ही किसी भी टीम की इस अफ्रीकी टीम पर यह सबसे बड़ी जीत भी है।

खास बात यह कि 1992, 1999 और 2003 में मिली हार के बाद भारत ने वर्ल्ड कप में दक्षिण अफ्रीका पर पहली जीत का स्वाद भी चख लिया।
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ससुराल में शतक के साथ किस्मत वाले हो गए धवन

अपने ससुराल में शतक लगाने वाले शिखर धवन टीम इंडिया के लिए इस मामले में बेहद लकी है कि भारत के लिए जब भी उन्होंने शतकीय पारी खेली उसे हर हाल में जीत ‌मिली है।

धवन ने अपने 55वें वनडे मैच करियर का सातवां शतक लगाया। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ धवन का यह दूसरा शतक है। उनके 7 शतकों में 4 विदेशी धरती पर लगे हैं जबकि 3 भारत में।

इस शतकीय पारी के साथ ही धवन वर्ल्ड कप में लगातार 2 अर्धशतक लगाने वाले भारत के तीसरे ओपनर बन गए हैं। इससे पहले सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली ही यह कारनामा कर सके हैं।

एक रिकॉर्ड और मेलबर्न में बचा रह गया वह है कि किसी भी टीम ने आज तक इस मैदान 300 से ज्यादा के लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकी है। इस मैदान पर कुल 9 बार 300 या उससे ज्‍यादा का लक्ष्य दिया गया और कोई भी हासिल नहीं कर सकी।
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