अपने पहले ही टेस्ट मैच में धुआंधार पारी खेल मोहाली टेस्ट भारत की ओर मोड़ने वाले शिखर धवन का दिल्ली टेस्ट में खेलना तय नहीं है। यह खुलासा खुद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने किया है।
यहां तक दूसरी पारी में भी उनका जलवा देखने को नहीं मिला। चौथे दिन फील्डिंग के दौरान उनके बाएं हाथ की दो अंगुलियां चोटिल हो गईं।
खेल खत्म होने के बाद उन्हें फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया। हालांकि उनकी चोट गंभीर नहीं है। लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें अगले दिन फील्डिंग नहीं करने की सलाह दी।
पांचवें दिन वह फील्डिंग करने नहीं आए। फील्ड से बाहर रहने के चलते वह ओपनिंग नहीं कर सकते थे। उनके स्थान पर चेतेश्वर पुजारा को ओपनिंग करनी पड़ी।
जबकि विराट कोहली नंबर पांच से नंबर तीन पर बल्लेबाजी के लिए आना पड़ा। सचिन तेंदुलकर का बल्लेबाजी क्रम नहीं बदला गया। लेकिन धोनी ने मैच के बाद बताया कि शिखर के चोटिल होने के चलते बल्लेबाजी नहीं कर सकते थे।
इसी को ध्यान में रखते हुए वह 133 रनों के लक्ष्य का पीछा करने के दौरान कोई जोखिम नहीं लेना चाहते थे।
वह शुरूआत में इसी लिए सजग होकर खेले। तेजी से रन बनाने के चलते अगर और विकेट गिर जाते तो टेस्ट को ड्रा के रूप में खोना काफी दुर्भाग्यशाली होता। धोनी ने सिर्फ इतना ही कहा कि हो सकता है शिखर अगले टेस्ट में नहीं खेलें।
हालांकि उन्होंने शिखर की पारी की खुले दिल से सराहना करते हुए कहा कि ज्यादातर युवा बल्लेबाज देश के लिए अपना प्रथम मैच खेलते वक्त अपने स्वभाविक खेल को भूल जाते हैं। उन्होंने शिखर से यही कहा कि वह अपना स्वभाविक खेल खेले।
अपने 50 रन पूरे करने के बाद इस बल्लेबाज ने यही किया और बड़ी पारी खेली। धोनी ने स्वीकार किया कि शिखर की इस पारी ने भारत की जीत में मुख्य भूमिका अदा की। अगर शिखर धवन अगले टेस्ट में नहीं खेलते हैं तो मुरली विजय के साथ मुंबई के अजिंक्य रहाणे को टेस्ट क्रिकेट में प्रवेश का मौका मिल सकता है।
हरभजन को बाहर किया जाना जायज
धोनी ने मोहाली टेस्ट से हरभजन सिंह को नहीं खिलाने के अपने निर्णय को जायज बताया। उन्होंने कहा कि पहले दो टेस्टों में आस्ट्रेलिया के पास खब्बू बल्लेबाज ज्यादा थे। लेकिन इस टेस्ट में ब्रैड हैडिन आ गए थे।
जिसके चलते उन्होंने प्रज्ञान ओझा को खिलाया। हालांकि ओझा का भी कोई कुसूर नहीं था। उन्होंने पिछल मैचों में शानदार प्रदर्शन किया है। इसलिए उन्हें उन्हें भी मौका दिया जाना बनता था।