धवन और जोरावर
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उन्होंने कहा, 'मैं हर रोज जोरावर को संदेश लिखता हूं। मुझे नहीं पता कि उन्हें वह संदेश मिल भी रहे हैं या नहीं, वह उन्हें पढ़ भी रहे हैं या नहीं। मुझे कोई उम्मीद नहीं है। मैंने इसे स्वीकार कर लिया है। मैं एक पिता हूं और मैं अपना कर्तव्य निभाने की कोशिश कर रहा हूं। मुझे उसकी याद आती है, मुझे दुख होता है लेकिन मैंने इसके साथ जीना सीख लिया है।'