भारतीय टीम के पूर्व बल्लेबाज संजय मांजरेकर का मानना है कि लॉर्ड्स टेस्ट के तीसरे दिन जैक क्राउली के साथ हुए विवाद के कारण शुभमन गिल की बल्लेबाजी पर असर पड़ा। गिल ने पहले दो मैचों में तीन शतक लगाए थे और करियर की सर्वश्रेष्ठ 269 रनों की पारी खेली थी, लेकिन तीसरे टेस्ट में वह बल्लेबाजी से प्रभावित नहीं कर सके जिस कारण भारत ने यह मुकाबला 22 रनों से गंवाया।
क्राउली के साथ हुआ था विवाद
लॉर्ड्स टेस्ट के तीसरे दिन का खेल समाप्त होने से ठीक पहले गिल और क्राउली के बीच तीखी बहस हुई थी। दरअसल, क्राउली समय बर्बाद कर रहे थे और दिन का खेल समाप्त होने का इंतजार कर रहे थे, जिससे गिल सहित अन्य भारतीय खिलाड़ियों के साथ उनकी बहस होने लगी। इंग्लैंड ने चौथे दिन इसका बदला लिया। दरअसल, इंग्लैंड ने भारत के सामने जीत के लिए 193 रनों का लक्ष्य रखा था, लेकिन भारत की बल्लेबाजी अच्छी नहीं रही। गिल भी क्रीज पर असहज दिखे और ब्रायडन कार्स की गेंद पर मात्र छह रन बनाकर आउट हो गए। गिल तब अपना विकेट गंवा बैठे जब टीम रनों के लिए लगातार संघर्ष कर रही थी और एक अच्छी साझेदारी की जरूरत थी।
संजय मांजरेकर ने विराट कोहली की तुलना में शुभमन गिल की मानसिकता पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि कोहली दबाव में और बेहतर प्रदर्शन करते थे, जबकि गिल का आक्रामक रवैया उनकी बल्लेबाजी पर नकारात्मक असर डाल रहा है। मांजरेकर ने कहा, विराट कोहली के साथ बात यह थी कि अगर मैच में तीखी नोंकझोक होती थी तो वह और भी अधिक उत्साहित हो जाते थे और बेहतर बल्लेबाज बन जाते थे। शुभमन गिल के बारे में मुझे ये बात निराश कर रही है। सोच रहा हूं कि शुभमन गिल किस ओर जा रहे हैं? क्योंकि ऐसा लग रहा था कि बल्लेबाज के रूप में शुभमन गिल पर इसका सही प्रभाव नहीं पड़ा है।
मांजरेकर ने कहा कि गिल ने लॉर्ड्स में अपना आक्रामक रूप शायद इसलिए दिखाया होगा क्योंकि उन्होंने बर्मिंघम में पिछले टेस्ट में 269 और 161 रन की पारी खेली थी। मांजरेकर ने कहा कि कप्तान होने पर आपको यह (आक्रामक रवैया) दिखाने की जरूरत नहीं होती। यह इसलिए दिखाया क्योंकि अब उन्हें टेस्ट मैच जीतने और इतने रन बनाने का आत्मविश्वास आ गया है।