संदीप शर्मा
उन्होंने आगे लिखा, 'इस तर्क के हिसाब से तो पाकिस्तान में हिंदुओं, अहमदियों, ईसाईयों और सिखों के नरसंहार पर किसी बाहरी को कुछ नहीं बोलना चाहिए क्योंकि वो उनका अंदरूनी मामला है।'
संदीप ने इसके अलावा जर्मनी में नाजी सरकार द्वारा किए गए नरसंहार, अमेरिका में अश्वेतों, चीन में उइगरों के साथ अत्याचार और भारत में 1984 में सिखों और मुसलमानों के साथ हुई हिंसा का भी उदाहरण देते हुए अंदरूनी मामले के संबंध में अपना विरोध जताया।