यह तेंदुलकर के सबसे अंडररेटेड शतकों में से एक है। तेंदुलकर ने पर्थ की उछाल भरी पिच पर मर्व ह्यूज, ब्रूस रीड और क्रेग मैकडरमॉट के घातक तेज आक्रमण के खिलाफ 161 गेंदों में 114 रन बनाए। हालांकि भारत मैच और सीरीज हार गया, लेकिन सचिन ने भारत के लिए इस सीरीज में 368 रन बनाए, जिसमें दो बड़े शतक शामिल हैं।
यह सचिन का पहला विश्व कप शतक था। 15 चौकों और एक छक्के की मदद से उन्होंने अकेले दम पर भारत को केन्या के 200 रन के लक्ष्य तक पहुंचाया। उन्होंने कुल मिलाकर छह विश्व कप शतक बनाए और टूर्नामेंट के लीडिंग रन-स्कोरर बन गए।
शेन वॉर्न, डेमियन फ्लेमिंग और माइकल कास्प्रोविच के शीर्ष स्तरीय ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ 131 गेंदों में खेली गई इस पारी को 'डेजर्ट स्टॉर्म' के नाम से जाना जाता है। सचिन ने शारजाह पार्क में ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की जमकर धुनाई की। उनकी पारी 285 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए आई और सचिन द्वारा जीत की कगार पर पहुंचाने के बावजूद भारत 34 रन से चूक गया।
यह मास्टर की भावनात्मक पारी में से एक थी, जो उनके पिता के दुर्भाग्यपूर्ण निधन के ठीक बाद आई थी। उन्होंने 101 गेंदों में 16 चौकों और तीन छक्कों की मदद से यह स्कोर बनाया, जिससे भारत को जीत मिली।
तेंदुलकर की 193 रन की पारी राहुल द्रविड़ और कप्तान सौरव गांगुली की शतकीय पारी का हिस्सा थी, जिसने भारत को लीड्स की कठिन सतह पर प्रसिद्ध सीरीज जीत दिलाई। उन्होंने 330 गेंदों में 19 चौकों और तीन छक्कों की मदद से यह रन बनाया।
मास्टर ब्लास्टर के लिए यह एक इतिहास रचने वाला शतक था क्योंकि उन्होंने अपना 35वां टेस्ट शतक जड़कर भारतीय दिग्गज और आदर्श सुनील गावस्कर के 34 टेस्ट शतकों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। भारत ने यह मैच 188 रनों से जीत लिया था।
यह शतक मुंबई में हुए 26/11 हमले के बाद आया था। चेन्नई में खेलते हुए सचिन ने 387 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 196 गेंदों में 103 रन बनाए, जिससे भारत को जीत मिली। उन्होंने यह पारी मुंबई में आतंकवादी हमले के पीड़ितों को समर्पित की।
यह तेंदुलकर का 50वां टेस्ट शतक था और ऐसा करने वाले वह पहले खिलाड़ी बने। हालांकि, दक्षिण अफ्रीका ने मैच जीत लिया।
यह विश्व क्रिकेट में एक ऐतिहासिक क्षण था। वनडे में पहली बार किसी बल्लेबाज ने दोहरा शतक लगाया था। तेंदुलकर ने इस पारी में 147 गेंदों में 25 चौके और तीन छक्के की मदद से 200 रन बनाए थे। भारत यह मैच 153 रन से जीता था।
यह सचिन का 49वां वनडे शतक और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका 100वां शतक था। उन्होंने 147 गेंदों में 12 चौकों और एक छक्के की मदद से 114 रन बनाए और इस ऐतिहासिक उपलब्धि तक पहुंचने के भारी दबाव के बीच खेलते हुए उन्होंने अपनी पारी समाप्त की। भारत यह मैच पांच विकेट से हार गया था।