वेस्ट इंडीज की वो चाल कामयाब रही जिसकी योजना सीरीज तय होने से बनाई जा रही थी। लेकिन इसमें अंपायर की बड़ी भूमिका रही।
मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के 24 साल के बेमिसाल करियर का यह अंतिम टेस्ट सीरीज है और वह कोलकाता में अपनी विदाई टेस्ट में बड़ी पारी खेलने के इरादे से क्रीज पर उतरे थे।
लेकिन वह एक बार फिर 'दूसरा' के शिकार हो गए। इस बार वह अपनी गलती से नहीं बल्कि अंपायर की बड़ी चूक की वजह से इसके शिकार बने।
भारतीय पारी का 29वां ओवर चल रहा था। गेंद फिरकी गेंदबाज शेन शिलिंगफोर्ड के हाथों में थी और वह अब तक दो विकेट झटक चुके थे।
सचिन खतरनाक गेंदबाजी कर रहे शिलिंगफोर्ड को बड़ी सावधानी से खेल रहे थे लेकिन इस चालाक गेंदबाज ने ऐसी चौथी गेंद डाली जिसे खेलने में मास्टर बल्लेबाज बेहद असहज महसूस कर रहा था।
शिलिंगफोर्ड ने 'दूसरा' डालकर तेंदुलकर का बड़ा विकेट झटक लिया। हालांकि टीवी रिप्ले में गेंद विकेट से ऊपर जा रही थी लेकिन अंपायर ने विवादित फैसला देते हुए उन्हें पगबाधा करार दिया।
10 रन ही बना पाए मास्टर
कोलकाता टेस्ट के दूसरे दिन के शुरुआती घंटे में जब वह बल्लेबाजी को उतरे तो प्रशंसकों से उनसे बड़ी पारी खेलने की आस थी लेकिन अंपायर के एक विवादित फैसले ने उनकी पारी का अंत का कर दिया। वह महज 10 रन बना पाए थे।
वेस्ट इंडीज ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज में सचिन को बड़ी पारी खेलने से रोकने के लिए पाकिस्तान के 'दूसरा' विशेषज्ञ सकलैन मुश्ताक से सेवाएं भी ली थी। सकलैन इसके लिए कैरेबियाई देश का दौरा किया था।
उन्होंने सुनील नारायन के अलावा शिलिंगफोर्ड को 'दूसरा' का गुर सिखाया था। कैरेबियाई टीम प्रबंधन की यह चाल सफल रही हालांकि इसमें अंपायर के गलत फैसले का अहम रोल रहा।
अनोखा संयोग
कोलकाता में सचिन अपना अंतिम मैच खेल रहे हैं। मैच के पहले दिन सचिन ने गेंदबाजी करते हुए शेन शिलिंगफोर्ड (4) को पगबाधा कराया।
सचिन ने पौने तीन साल बाद टेस्ट क्रिकेट में पहला विकेट हासिल किया था।
संयोग यह रहा कि सचिन ने जिस कैरेबियाई बल्लेबाज को पगबाधा आउट किया था, उसकी फिरकी से ही सचिन की पारी खत्म हुई। सचिन ने शिलिंगफोर्ड को आउट किया था और शिलिंगफोर्ड ने सचिन को पवेलियन भेजा।