क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर ने अपने कॅरियर में ढेरों रिकॉर्ड बनाए और कई उपलब्धियां हासिल की लेकिन संन्यास ले चुके इस महान बल्लेबाज को एक बात का मलाल अब तक है।
शुक्रवार को सचिन ने मामले का खुलासा किया और कहा कि भारतीय क्रिकेट कप्तान के रूप में लंबा कार्यकाल नहीं मिलने की निराशा से उबरना उनके लिए बहुत मुश्किल था।
सचिन को अपने 24 साल के चमकदार कॅरियर के दौरान दो बार भारतीय टीम की कप्तानी सौंपी गई लेकिन वह इसमें खास सफल नहीं रहे। वह पहली बार 1996 में कप्तान बने लेकिन टीम के खराब प्रदर्शन के कारण उन्हें 1997 में इस पद से हटा दिया गया।
अब तक 6 वर्ल्ड कप खेल चुके सचिन ने कहा, "मेरे लिए क्रिकेट व्यक्तिगत नहीं बल्कि टीम खेल है। ऐसा समय आता है जबकि कप्तान अपनी भूमिका निभाता है।"
उन्होंने आगे कहा, टीम का कप्तान मैदान पर महत्वपूर्ण फैसले करता है लेकिन आखिर में मैच जीताने के लिए बल्लेबाजों को ही रन बनाने होते हैं और गेंदबाजों को ही सही क्षेत्र में गेंद करनी पड़ती है।