भारतीय उपकप्तान ने इस साल विभिन्न प्रारूपों को मिलाकर दस शतक समेत 2442 रन बनाकर श्रीलंका के सनत जयसूर्या का रिकार्ड तोड़ा। रोहित ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में पारी की शुरुआत की। उन्होने वेस्टइंडीज के खिलाफ वन-डे श्रृंखला में ‘मैन ऑफ द सीरिज’ का पुरस्कार जीतने के बाद कहा, ‘यह साल बहुत अच्छा रहा। विश्व कप जीतते तो और बेहतर होता, लेकिन पूरे साल टीम के रूप में हर प्रारूप में हम अच्छा खेले।’
रोहित ने कहा, ‘मैं अपनी बल्लेबाजी का पूरा मजा ले रहा हूं और यह सिलसिला यहीं नहीं रूकेगा। अभी आने वाला साल काफी रोमांचक है।’ विश्व कप में पांच शतक और एक दोहरा शतक जमा चुके रोहित ने कहा, ‘अब मैं अपनी बल्लेबाजी को बखूबी समझ रहा हूं। मैं अपनी सीमाओं को ध्यान में रखकर खेलना चाहता हूं।’
दूसरी ओर वेस्टइंडीज के खिलाफ श्रृंखला के आखिरी मैच में नाबाद 39 रन बनाने वाले भारतीय हरफनमौला रवींद्र जडेजा ने कहा कि उन्हें दुनिया को नहीं बल्कि खुद को साबित करना है कि वह वनडे क्रिकेट खेल सकते हैं। जडेजा सीमित ओवरों की टीम का नियमित हिस्सा नहीं थे, लेकिन इंग्लैंड में वनडे विश्व कप से पहले योजना का हिस्सा बने।
भारत के पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने उन्हें ‘टुकड़ों टुकड़ों में खेलने वाला खिलाड़ी’ कहा था, लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ विश्व कप सेमीफाइनल में उन्होंने 59 गेंदों में 77 रन बनाकर टीम को जीत के करीब पहुंचा दिया था। जडेजा ने कहा कि उन्हें खुद को साबित करना था कि वह अभी भी सीमित ओवरों का क्रिकेट खेल सकते हैं।
कटक में खेले गए आखिरी वन-डे की अपनी पारी के बारे में जडेजा ने कहा कि, 'यह काफी अहम पारी थी क्योंकि यह निर्णायक मैच था । विकेट बल्लेबाजी के लिये उम्दा था। हमें बस गेंद को भांपकर खेलना था।’ उन्होंने कहा, ‘मैने इस साल ज्यादा वनडे क्रिकेट नहीं खेला, लेकिन जब भी मौका मिला गेंदबाजी, बल्लेबाजी और फील्डिंग में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की।’
छह गेंद में नाबाद 17 रन बनाने वाले शार्दुल ठाकुर के बारे में उन्होंने कहा, ‘आखिरी गेंद तक खेलना अहम था। हमें पता था कि हम ही जीतेंगे।’ जडेजा ने स्वीकार किया कि टीम को फील्डिंग पर मेहनत करनी होगी। उन्होंने कहा, ‘पूरी श्रृंखला में कई कैच छूटे। हमारी फील्डिंग के स्तर को देखते हुए ऐसा नहीं होना चाहिए था। दूधिया रोशनी में ओस के कारण ऐसा हो जाता है।’