आईपीएल-8 के खिताबी जंग में चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस की टीम आमने-सामने थी तो उसके कप्तानों के पर अपनी टीम को चैंपियन बनाने का खासा दबाव था।
चेन्नई को छठी बार फाइनल में पहुंचाने वाले कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की नजर आईपीएल के तीसरे खिताब पर थी तो रोहित शर्मा दूसरी बार अपनी टीम को खिताब दिलाना चाहते थे।
मुंबई की टीम का प्रदर्शन इस सत्र में सभी को चौंकाने वाला था क्योंकि हार के साथ शुरुआत करने के बाद उसे 6 में से 5 मैचों में हार मिली, फिर जोरदार वापसी करते हुए अंतिम 8 में से 7 मैच जीतकर प्लेऑफ में अपनी जगह पक्की कर ली।
हालांकि पहले बल्लेबाजी करने का न्योता मिलने के बाद मुंबई इंडियंस टीम की शुरुआत खराब रही और पार्थिव पटेल खाता खोले बगैर ही रन आउट हो गए। इसके बाद लिंडल सिमंस का साथ देने कप्तान रोहित क्रीज पर आए। उन्होंने आतिशी पारी खेली जरूर लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया जब वह क्रीज पर खड़े थे तो लिडंज सिमंस के कारण उन्हें 19 में से सिर्फ एक ही गेंद खेलने को मिली।
साथी बल्लेबाज सिमंस ने रोके रखा रोहित को बल्लेबाजी से!
पहले ही ओवर की पांचवीं गेंद पर पार्थिव पटेल (0) का विकेट गंवाने के बाद लिंडल सिमंस के साथ मुंबई की पारी को आगे बढ़ाने के लिए कप्तान रोहित शर्मा क्रीज पर आए और उन्होंने आते ही जोरदार बल्लेबाजी का नजारा पेश किया।
उन्होंने दूसरे ओवर में मोहित शर्मा की गेंद पर एक छक्का और 2 चौके समेत कुल 16 रन ठोंक दिए। इसके बाद अगले यानी तीसरे ओवर में रोहित ने आशीष नेहरा की गेंद पर लगातार 2 चौका जमाने के बाद पांचवीं गेंद पर एक रन ले लिया और अपनी स्ट्राइक बदल ली।
लेकिन इसके बाद उन्हें लगातार 19 गेंदों के दौरान सिर्फ एक गेंद पर ही बल्लेबाजी करने का मौका मिला।
हुआ यूं कि उन्होंने नेहरा के ओवर की पांचवीं पर एक रन ले लिया। इसके बाद सिमंस क्रीज पर आ गए। मुंबई की पारी का चौथा ओवर सिमंस खेल गए। फिर पांचवें ओवर की दूसरी गेंद को छोड़ दिया जाए तो यह ओवर भी सिमंस ने ही खेला। फिर कुछ ऐसा संयोग बना कि छठा ओवर भी सिमंस ने ही खेल डाला। इस दौरान रोहित नॉन-स्ट्राइकर एंड पर अपनी पारी का इंतजार करते रहे।
इन 19 में से 18 गेंदों में कुल 34 रन बने जिसमें सिमंस के बल्ले से 31 रन निकले। इसके बाद रोहित को फिर से बल्लेबाजी करने का मौका मिला तो उन्होंने आतिशी बल्लेबाजी का नजारा पेश किया और महज 25 गेंदों में अपनी फिफ्टी ठोंक दी। हालांकि वह अगली गेंद पर ड्वेन ब्रॉवो की गेंद पर आउट हो गए।
लेकिन तब तक वह सिमंस के साथ दूसरे विकेट के लिए 119 रनों की साझेदारी कर टीम को ऊर्जा प्रदान कर चुके थे। दोनों बल्लेबाजों ने अपने-अपने अर्धशतक लगाए जिससे मुंबई फाइनल मुकाबले में 200 से ज्यादा का लक्ष्य देने में कामयाब हो गई।
टूर्नामेंट में पहली बार की गेंदबाजी फाइनल में, झटका विकेट
दूसरी ओर, चेन्नई के गेंदबाजों की मुंबई के बल्लेबाजों ने जमकर धुनाई की। मुंबई ने पावरप्ले में 61 रन ठोंक दिए जो इस सत्र में उसकी संयुक्त रूप से सबसे तेज शुरुआत भी रही। जवाब में चेन्नई ने जब 203 रनों के बड़े लक्ष्य का पीछा करना शुरू किया तो उसकी पावरप्ले के दौरान बेहद धीमी शुरुआत रही।
चेन्न्ई के बल्लेबाज पावरप्ले में एक विकेट के नुकसान पर 31 रन ही बना सके। फाइनल मैच में यह उनकी अब तक सबसे धीमी शुरुआत रही।
फिलहाल बात करते हैं चेन्नई के सलामी बल्लेबाज ड्वेन स्मिथ जो 2013 के फाइनल में मुंबई इंडियंस की ओर से खेल रहे थे। लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है और वह चेन्नई की टीम में हैं। उन्होंने इस सत्र में फाइनल मैच से पहले एक भी ओवर नहीं डाला था लेकिन आज उन्हें गेंदबाजी करने का मौका मिला।
ड्वेन ने अपनी टीम के खास गेंदबाजों की धुनाई के बीच मुंबई के लिडंल सिमंस का विकेट चटका लिया। सिमंस जब ड्वेन के शिकार बने तो उस समय तक वह 68 रन बना चुके थे।
पर्पल कैच पर कब्जा जमाए रहे चेन्नई के ड्वेन ब्रॉवो टूर्नामेंट के सबसे सफल गेंदबाज रहे जिन्होंने इस बार 26 विकेट झटके। वे आईपीएल इतिहास के पहले ऐसे गेंदबाज बन गए हैं जिन्होंने दो बार इस टूर्नामेंट में 25 से ज्यादा विकेट झटके हैं। 2013 में उन्होंने 32 विकेट निकाले थे।