अश्विन के मुताबिक, भारत का सफेद गेंद का भविष्य रोमांचक लगता है क्योंकि इसका अतीत साहसी विकल्पों पर आधारित था, यह बदलाव रोहित और द्रविड़ की हिम्मत से शुरू हुआ। आज गंभीर और नई पीढ़ी उस नींव पर आगे बढ़ रहे हैं। भारत को 2026 टी20 विश्व कप के करीब होने के साथ इसे बरकरार रखने की जरूरत है।
भारत के पूर्व ऑफ-स्पिनर रविचंद्रन अश्विन का मानना है कि आज भारत जिस सफेद गेंद की दुनिया में एक ताकत बनकर उभरा है, वह कहानी गौतम गंभीर से नहीं बल्कि रोहित शर्मा और राहुल द्रविड़ के दौर से शुरू हुई थी। गंभीर भले ही अपने शुरुआती रेड-बॉल कोचिंग कार्यकाल को लेकर सवालों का सामना कर रहे हों, लेकिन भारत की सफेद गेंद की सफलता उसी ताल पर आगे बढ़ रही है, जिसे रोहित-द्रविड़ की सोच ने स्थापित किया था।
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गंभीर ने कहा था उपलब्धियां याद रखना
हाल ही में दक्षिण अफ्रीका से 0-2 से टेस्ट सीरीज हार के बाद गंभीर ने कहा था कि उन्हें हटाने का फैसला बीसीसीआई करेगा, लेकिन बोर्ड को व्हाइट बॉल फॉर्मेट में उनकी उपलब्धियां नहीं भूलनी चाहिए। गंभीर की देखरेख में भारत ने 2025 चैंपियंस ट्रॉफी और 2025 एशिया कप टी20 जीता था। अश्विन के बयान का आधार गंभीर का यह बयान हो सकता है, लेकिन उन्होंने कोच का नाम नहीं लिया है। अश्विन से पहले पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने भी गंभीर के इस बयान पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि सफेद गेंद की टीम कोहली, रोहित और द्रविड़ ने बनाई थी।
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'इरादा सिर्फ कहा नहीं गया, मैदान पर जिया गया'
अश्विन के मुताबिक भारत की मौजूदा आक्रामक बल्लेबाजी का मूल रोहित शर्मा और द्रविड़ के उस विजन में है, जिसने टीम को सिर्फ रणनीति नहीं दी बल्कि मैदान पर उसका उदाहरण भी पेश किया। उन्होंने कहा, 'टी20 और वनडे में भारत की जिस तेज स्कोरिंग पहचान बनी है, उसका बड़ा श्रेय रोहित और राहुल भाई को जाता है। उन्होंने सिर्फ बताया नहीं, बल्कि टीम को उसी तरह खिलाकर दिखाया।' उनकी नजर में सफेद गेंद क्रिकेट अब औसत बल्लेबाजी नहीं बल्कि स्ट्राइक-रेट का खेल है और भारत ने इस बदलाव को दिल से अपनाया।
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विश्व कप 2024: टेम्पलेट की परिभाषा
रोहित शर्मा की बल्लेबाजी ने इस बदले हुए डीएनए को साबित किया। 2024 टी2- विश्व कप में उनका स्ट्राइक रेट 156 से ऊपर था। सेंट लूसिया में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 41 गेंदों में 92 और इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में चुनौतीपूर्ण विकेट पर 57 रन बनाए। ये सिर्फ पारियां नहीं थीं, बल्कि भारत की नई मानसिकता की घोषणा थीं। रोहित ने दिखाया कि पहले ही ओवर में दबाव बनाओ और मैच की कहानी वहीं से लिखो।
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नई पीढ़ी में दिखी वही छाप
इस नए सफेद गेंद वाले भारत की झलक 2025 में अभिषेक शर्मा की बल्लेबाजी में साफ दिखाई दी। एशिया कप टी20 2025 में उनके आंकड़े चौंकाने वाले थे। अभिषेक ने 44.85 की औसत और करीब 200 के स्ट्राइक रेट से 314 रन बनाए। अभिषेक ने गेंदबाजों के नाम नहीं देखे, बल्कि उन्होंने सिर्फ मारने की जगह देखी। उनकी शुरुआत, रोहित के 2024 वाले टेम्पलेट की याद दिलाती है। पहले 12 गेंदों में अटैक, रन गति को नियंत्रण में रखना, फील्ड को डिफेंसिव मोड में धकेलना...अश्विन के लिए यह सबसे बड़ी जीत है, जब सोच इंसानों से आगे चलती है।
'जितना समय है, उतना आनंद ले लो'
अश्विन ने एक भावुक संदेश भी दिया। उन्होंने कहा, 'कब तक हम विराट कोहली और रोहित शर्मा को खेलते देख पाएंगे, पता नहीं। जब तक हैं, उन्हें सेलिब्रेट करें।' उन्होंने कहा कि समय तेजी से गुजरता है और बाद में हमेशा यही सुनाई देता है- उन्हें वापस बुलाओ। इसलिए जब तक वे खेल रहे, उन्हें सेलिब्रेट करें। जिंदगी बहुत तेजी से आगे बढ़ती है। समय किसी का इंतजार नहीं करता। यह जरूरी है कि हम समझें कि समय कम है, इसलिए बेहतर है कि हम जो भी कर रहे हैं उसका आनंद लें।'