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रोहित-द्रविड़ युग: शुरुआत शानदार लेकिन अभी कई इम्तिहान बाकी, ऑस्ट्रेलिया में होगा असली टेस्ट

Wed, 24 Nov 2021 01:11 AM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रोहित और द्रविड़ ने पहली सीरीज में शुरुआत एकतरफा जीत के साथ की है, लेकिन आने वाले समय में उनके सामने कई चुनौतियां होंगे। ऑस्ट्रेलिया में वर्ल्डकप के बाद युवा खिलाड़ियों को ये दोनों किस तरह से निखारते हैं ये भी बड़ी चुनौती होगी। 
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रोहित शर्मा और राहुल द्रविड़ - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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टी-20 वर्ल्डकप में भारत के खराब प्रदर्शन के बाद भारत ने टी-20 सीरीज में न्यूजीलैंड को 3-0 से हराया है, लेकिन फैंस को अभी भी वर्ल्डकप भूला नहीं है। कई फैंस पाकिस्तान और न्यूजीलैंड को हाथों मिली हार को भुला नहीं पा रहे हैं। इस सीरीज में भारत नए कप्तान और कोच के साथ उतरा था। दोनों पहली परीक्षा पास कर ली है, लेकिन आगे चलकर रोहित और द्रविड़ के सामने कई चुनौतियां होंगी। मध्यक्रम की समस्या उनमें से एक हैं और हर खिलाड़ी को बड़े टूर्नामेंट के लिए तैयार करना भी मुश्किल चुनौतीपूर्ण काम होगा। 
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पिछले कुछ सालों से भारत द्रिपक्षीय सीरीज में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन आईसीसी ट्रॉफी नहीं जीत पा रहा। द्रविड़ और रोहित को मिलकर आईसीसी ट्रॉफी के इस सूखे को खत्म करना होगा। इस सीरीज में भारत की ओपनिंग जोड़ी से लेकर गेंदबाजों ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन घरेलू सीरीज जीतना कभी भी टीम इंडिया के लिए चिंता की बात नहीं रही है। इन दोनों को आईसीसी टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करना होगा। 

न्यूजीलैंड सीरीज में कई सवालों के जवाब मिले
न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में रोहित शर्मा पहली बार भारत के नियमित कप्तान के रूप में उतरे थे। ऐसे में भारतीय टीम को लेकर कई सवाल थे, जिनके जवाब मिल चुके हैं। भारत की ओपनिंग जोड़ी ने शानदार खेल दिखाया और कप्तान रोहित ने जिम्मेदारी लेते हुए बल्ले से रन बनाए। फील्डिंग को दौरान उन्होंने गेंदबाजों को ठीक से चलाया। युवा खिलाड़ियों को खुलकर खेलने की आजादी दी और उन्हें भारोसा दिलाया कि टीम में उनकी जगह सुरक्षित है। युवा तेज गेंदबाजों ने शानदार गेंदबाजी की और अश्विन अक्षर की जोड़ी ने भी कमाल किया। भारत की फील्डिंग भी अच्छी रही और ऑलराउंडर वेंकटेश अय्यर ने दिखाया कि उनके अंदर हार्दिक की जगह लेने की क्षमता है। 
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इन चीजों पर काम करना जरूरी
भारत के मध्यक्रम ने एक बार फिर निराश किया है। इस सीरीज शुरुआती दोनों मैच टॉप ऑर्डर बल्लेबाजों ने जिताए, लेकिन बाद में कुछ रन बनाने में ही भारत के कई विकेट गिर गए। तीसरे मैच में भी ऐसा ही हुआ। अंत में दीपक चाहर और हर्षल पटेल ने मिलकर भारत को उस स्कोर तक पहुंचाया, जहां मध्यक्रम के बल्लेबाजों को ले जाना चाहिए था। सूर्यकुमार यादव ने पहले मैच में शानदार अर्धशतक लगाया, लेकिन बाकी दोनों मैचों में 1 रन और 0 का स्कोर बनाया। वहीं श्रेयस और पंत भी कुछ खास नहीं कर सके हैं। रोहित और द्रविड़ को मिलकर इन खिलाड़ियों पर काम करना होगा। 

रोहित-द्रविड़ के सामने कई चुनौतियां
रोहित शर्मा और राहुल द्रविड़ के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि सभी खिलाड़ियों को बड़े मैचों की आदत लगाई जाए, ताकि 2021 वर्ल्डकप जैसी स्थिति दोबारा न बने। जहां भारत के पास हार्दिक का विकल्प नहीं था। ऐसे में हर्षल पटेल, अक्षर पटेल और बाकी खिलाड़ियों को समय-समय पर मौके देनें होंगे ताकि वो जरूरत पड़ने पर बड़े मैचों में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकें। वहीं मध्यक्रम में खिलाड़ियों को इस तरह से तैयार करना होगा कि वो जरूरत के हिसाब से बल्लेबाजी कर सकें। टी-20 में बल्लेबाजों को ऊपर-नीचे खेलना पड़ता है, जैसे कि अय्यर ने पहले मैच में निचले क्रम में बल्लेबाजी की और दूसरे मैच में तीसरे नंबर पर आए। इसके बाद तीसरे मैच में फिर से निचले क्रम पर बल्लेबाजी की। इन खिलाड़ियों को ऐसे हालातों के लिए तैयार करना होगा। 
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