रिकी पोंटिंग और माइकल वॉ जैसे ऑस्ट्रेलिया के पूर्व खिलाड़ियों ने आईसीसी द्वारा विराट कोहली पर लगाए गए जुर्माने को कम बताया और क्रिकेट की वैश्विक संस्था पर भारतीय खिलाड़ी के प्रति उदारता दिखाने का आरोप लगाया। वहीं, भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने आईसीसी के फैसले का समर्थन किया और कहा कि जुर्माने को लेकर कोहली पर किसी तरह की मेहरबानी नहीं दिखाई गई।
कोहली पर लगा था 20 प्रतिशत जुर्माना
कोहली और ऑस्ट्रेलिया के युवा बल्लेबाज सैम कोंस्टास के बीच मेलबर्न टेस्ट के पहले दिन धक्का-मुक्की हुई थी जिसके बाद आईसीसी ने कोहली पर मैच फीस का 20 प्रतिशत जुर्माना और एक डिमेरिट अंक दिया था। आईसीसी ने बताया था कि कोहली पर आईसीसी की आचार संहिता के आर्टिकल 2.12 के तहत जुर्माना लगाया गया है और उन्होंने आचार संहिता के लेवल-1 के तहत यह कार्रवाई की थी। यह मैदान पर शारीरिक भिड़ंत के लिए लगाया जाने वाला निचले स्तर का जुर्माना था। हालांकि, आधिकारिक एलान से पहले ऐसी चर्चा थी कि कोहली पर एक मैच का प्रतिबंध भी लग सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैदानी अंपायर जोएल विल्सन और माइकल गफ, तीसरे अंपायर शरफुद्दौला इब्ने शाहिद और चौथे अंपायर शॉन क्रेग ने कोहली पर आरोप लगाए थे।
ऑस्ट्रेलिया मीडिया का कुछ वर्ग और कई पूर्व क्रिकेटरों ने आईसीसी पर निशाना साधा और कोहली के प्रति उदारता दिखाने का आरोप लगाया। पोंटिंग और वॉ ने कोहली को कड़ी सजा नहीं देने के लिए अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। लेकिन गावस्कर की राय अलग थी और उन्होंने कोहली पर जितना जुर्माना लगाया उसका समर्थन किया।
गावस्कर ने ऑस्ट्रेलियाई मीडिया को लगाई लताड़
गावस्कर ने एक स्पोर्ट्स चैनल से कहा, हां, जितना अनुभव कोहली को है उससे आप यह कह सकते हैं कि सजा थोड़ी हल्की है, लेकिन यह अधिकतम सजा उन्हें आईसीसी ने दी है। उन्होंने किसी तरह का एहसान नहीं किया है। उदाहरण के तौर पर अगर कोहली पर 10 प्रतिशत जुर्माना लगता तो आप कह सकते थे कि मेहरबानी दिखाई गई है, लेकिन लेवल-1 के तहत अधिकतम सजा 20 प्रतिशत है। मैं इतना समझा हूं कि उन पर जुर्माने के साथ एक डिमेरिट अंक भी लगाया गया है। यह अधिकतम सजा थी जो उन्हें दी गई है। कोई विशेष मेहरबानी नहीं की गई है। आप किसी को फांसी पर नहीं चढ़ा सकते और ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ऐसी ही चीज की मांग कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया मीडिया सोच रहा है कि वह इसलिए बच गए क्योंकि वह कोहली थे।