क्यों सफल हुए हैं चहल और हसरंगा?
स्पिन गेंदबाज हमेशा अपनी गेंदों को फ्लाइट देता है और बल्लेबाज को बड़े शॉट का लालच देकर विकेट निकालता है। स्पिन गेंदबाजों को अधिकतर विकेट कैच आउट के रूप में ही मिलते हैं। चहल और हसरंगा ने इस सीजन यही काम करके दिखाया है। दोनों ने अपनी गेंदों को जमकर फ्लाइट दी और बल्लेबाजों ने उनके खिलाफ छक्के लगाने की कोशिश की। कई बार बल्लेबाज सफल भी हुए। इसी वजह से ये दोनों गेंदबाज इस सीजन छक्के खाने के मामले में भी अव्वल हैं। हसरंगा ने 30 और चहल ने 27 छक्के खाए हैं, लेकिन इसी चक्कर में बल्लेबाजों ने दोनों गेंदबाजों को विकेट भी दिए हैं। इसी वजह से ये दोनों विकेट लेने के मामले में सबसे आगे हैं।
इस सीजन चहल का इकोनॉमी रेट लगभग आठ के करीब है, जबकि हसरंगा ने साढ़े सात के इकोनॉमी रेट से रन खर्चे हैं। ये दोनों ही गेंदबाज एक मैच में पांच विकेट ले चुके हैं और अपने दम पर मैच पलटा है। वहीं, कंजूसी से गेंदबाजी करने वाले स्पिन गेंदबाज उतने प्रभावी नहीं रहे हैं।
कंजूस गेंदबाज नहीं छोड़ पाए प्रभाव
इस सीजन कंजूसी से गेंदबाजी करने वाले गेंदबाज ज्यादा प्रभावी नहीं साबित हुए हैं। सुनील नरेन इस सीजन सबसे कंजूस गेंदबाज रहे हैं। उन्होंने सिर्फ 5.57 के इकोनॉमी रेट से रन खर्चे हैं, लेकिन 14 मैचों में 56 ओवर की गेंदबाजी करने के बाद नौ विकेट ही ले पाए हैं। इसी वजह से विपक्षी बल्लेबाजों ने आखिरी ओवरों में कोलकाता के बाकी गेंदबाजों की जमकर पिटाई की है और यह टीम प्लेऑफ में भी नहीं पहुंच पाई।
मोईन अली इस सीजन दूसरे स्पिन गेंदबाज रहे, जिन्होंने 10 मैच खेले और 6.62 की इकोनॉमी से रन दिए। उनके नाम आठ विकेट रहे। अली भी अपनी गेंदबाजी से टीम की मदद नहीं कर पाए। चेन्नई कई बार बड़ा स्कोर बनाकर मैच हार गई। प्लऑफ में पहुंचना तो दूर यह टीम अंक तालिका में नौवें स्थान पर रही। कोलकाता की तरह चेन्नई के गेंदबाजों की भी आखिरी ओवरों में जमकर पिटाई हुई।